सिद्धारमैया के शपथ ग्रहण में विपक्ष के 22 दलों को न्योता भेजा गया था। इसमें सपा, आरजेडी, शिवसेना और तृणमूल कांग्रेस जैसे सभी बड़े दल शामिल थे। कांग्रेस इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकता की एक बड़ी तस्वीर के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। लेकिन कांग्रेस ने इस बेहद महत्त्वपूर्ण समझे जा रहे कार्यक्रम में अरविंद केजरीवाल को न्योता नहीं भेजा। इसमें आम आदमी पार्टी और केसीआर की भारत राष्ट्र समिति भी शामिल है। क्या इन दलों को साथ लिए बिना कांग्रेस का लक्ष्य पूरा हो सकता है? भाजपा ने आम आदमी पार्टी को न बुलाए जाने पर चुटकी ली है। बीजेपी ने कहा है कि कांग्रेस अरविंद केजरीवाल को इस काबिल ही नहीं समझती कि उन्हें कार्यक्रम में बुलाया जाए।