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Ajit Pawar Plane Crash: अजित पवार का प्लेन क्रैश एक सोची-समझी साजिश, जीरो एफआईआर में दावा!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Wed, 25 Mar 2026 02:27 AM IST

 NCP-SCP नेता रोहित पवार ने कहा, "अजित पवार पिछले 40 साल से जनता की सेवा कर रहे थे। किसी हादसे या साज़िश के बाद उनकी मौत हो गई। इस मामले की जांच के लिए FIR ज़रूरी है.लेकिन दुर्भाग्यवश से, हमारी ज़ीरो FIR मुंबई, पुणे, या बारामती में फ़ाइल नहीं की गई। जब हम दिल्ली गए, तो हमने राहुल गांधी से इस बारे में बात की.उन्होंने कहा, उस राज्य में जाओ जहां इंसाफ़ मिल सकता है हमने कर्नाटक में FIR की, और यह उस राज्य के DG के ज़रिए महाराष्ट्र के DG तक पहुंची। अब, हमें देखना होगा कि यह सरकार इस बारे में क्या करती है

अजित पवार से जुड़ी एक कथित प्लेन क्रैश की खबर को लेकर सोशल मीडिया और कुछ अनौपचारिक स्रोतों में यह दावा किया जा रहा है कि यह घटना कोई सामान्य दुर्घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश हो सकती है, और इसी संदर्भ में “जीरो एफआईआर” दर्ज किए जाने की भी बात कही जा रही है। हालांकि, इस प्रकार के दावों को लेकर अब तक किसी आधिकारिक एजेंसी, सरकार या विश्वसनीय समाचार संस्थान द्वारा ठोस पुष्टि सामने नहीं आई है। जीरो एफआईआर का मतलब होता है कि किसी भी पुलिस स्टेशन में, घटना क्षेत्र के अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना, तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जा सकती है, ताकि जांच में देरी न हो। ऐसे मामलों में यदि किसी व्यक्ति या समूह को संदेह होता है कि घटना के पीछे साजिश हो सकती है, तो वे प्रारंभिक आधार पर इस तरह की एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं, जिसके बाद जांच एजेंसियां तथ्यों की पुष्टि करती हैं।

अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति में एक प्रमुख और प्रभावशाली नेता रहे हैं, और उनके नाम से जुड़ी किसी भी बड़ी घटना या अफवाह का तेजी से फैलना स्वाभाविक है। लेकिन यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि राजनीतिक व्यक्तित्वों के बारे में कई बार अपुष्ट या भ्रामक खबरें भी वायरल हो जाती हैं, जो बाद में गलत साबित होती हैं। प्लेन क्रैश जैसी गंभीर घटना में आमतौर पर नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और अन्य संबंधित एजेंसियां विस्तृत जांच करती हैं, जिसमें तकनीकी खराबी, मौसम की स्थिति, पायलट की त्रुटि और अन्य संभावित कारणों की गहन पड़ताल की जाती है। यदि किसी साजिश की आशंका होती है, तो सुरक्षा एजेंसियां भी इसमें शामिल होती हैं।

इसलिए, जब तक किसी आधिकारिक रिपोर्ट या विश्वसनीय स्रोत से स्पष्ट जानकारी सामने न आए, तब तक इस तरह के साजिश संबंधी दावों को सावधानीपूर्वक और संदेह के साथ देखना चाहिए। अफवाहों पर विश्वास करने से न केवल भ्रम फैलता है, बल्कि यह जांच प्रक्रिया को भी प्रभावित कर सकता है। सही जानकारी के लिए हमेशा विश्वसनीय समाचार स्रोतों और आधिकारिक बयानों पर ही भरोसा करना चाहिए।

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