राज्य स्तरीय पोरी मेले के अंतिम दिन त्रिलोकनाथ से श्रद्धालुओं का एक जत्था मणिमहेश के लिए रवाना हो गया। जिसे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया और शिव की जयकारों से पूरा माहौल गूंज उठा। छड़ी यात्रा के रवाना होने से पहले मणिमहेश के सभी श्रद्धालु एक स्थान पर एकत्रित हुए और जयकारे लगने लगे को देवी-देवताओं के चेलों को खेल आई। रविवार सुबह यह सभी श्रद्धालू भगवान त्रिलोकीनाथ से आशीर्वाद लेकर अपनी मन की मुरादों को लेकर 150 के करीब श्रद्धालुओं का जत्था मणिमहेश की ओर रवाना हुआ। इसमें 40 से अधिक महिलाएं भी शामिल है। यह जत्था 16,800 फुट ऊंचे कुगती जोतकर होकर कदमताल कर पांच दिन बाद पवित्र झील मणिमहेश पहुंचेगी। इस दौरान सभी श्रद्धालु करीब 90 किमी के पथयात्रा में उबड़ खाबड़ रास्तों से होकर गुजरेंगे। जिनकी कुछ मुरादें पूरी हुई है तो कुछ श्रद्धालु मन्नतों को भी मन में संजोकर निकले हैं। जत्थे का पहला रात्रि पड़ाव थिरोट के समीप होगा। 19 अगस्त को रापे गांव के कुछ दूरी पर तो 20 अगस्त को को इनका तीसरा रात्रि पड़ाव खोलड़ु पधर से एक किमी आगे होगा। जबकि 21 अगस्त को केलिंग मंदिर और 22 अगस्त को अलियास और 23 को छठे दिन यह जत्था पवित्र झील मणिमहेश पहुंचेगा।