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Una: चरोला पंचायत के वार्ड नंबर-5 के निवासियों का मुर्गियों की दुर्गंध ने जीना किया दुश्वार

केंद्र व राज्य सरकारें स्वच्छता, व स्वास्थ्य अभियानों पर चाहे कितने भी करोड़ों रुपए खर्च कर दें लेकिन ऐसी योजनाओं को धरातल पर अमलीजामा पहनाना बहुत ही दूर की बात है, हालांकि इन योजनाओं को क्रियान्वित करने वाली एजेंसियां खोखले दावे करने से पीछे नहीं हटती देखी जा सकती हैं और ग्राउंड रिपोर्ट कागजों तक ही सीमित रखकर केंद्र व राज्य सरकारों को बेवकूफ बनाने व वाहवाही बटोरने से भी गुरेज नहीं करती है, आखिर जिला प्रशासन और पंचायतों का यह सिलसिला कब तक चलता रहेगा इसका किसी को भी अंदाजा नहीं है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के जिला ऊना की ग्राम पंचायत चरोला के वार्ड नंबर पांच की, यहां पर पंचायत द्वारा वर्ष 2016 में आबादियों के बीच एक पोल्ट्री फॉर्म खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया जिसके चलते स्थानीय वाशिंदों ने इसका विरोध भी किया था, लेकिन उनकी एक भी ना सुनते हुए पंचायत की अनुमति से वहां पर रिहायशी आबादियों के बीच पोल्ट्री फार्म खोल दिया गया, ऐसे में स्थानीय लोग जिला प्रशासन के पास भी पहुंचे, लेकिन करीब 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी आज दिन तक किसी ने भी उनकी एक नहीं सुनी है। ऐसे में स्थानीय निवासियों की समस्या को जानने के लिए मीडिया टीम जब ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो वहां पर भयानक दुर्गंध और अथाह मक्खियों को देखते ही होश उड़ गए, जब टीम द्वारा गांव वासियों में बाबूराम, उर्मिला देवी, प्रिया विनोद शर्मा, दिलबाग सिंह व अंजना कुमारी सहित अनेकों से संपर्क साधा गया, तो उनका कहना था कि हम काफी लंबे समय से इस पोल्ट्री फार्म की गंदगी का सामना करते आ रहे हैं, इस पोल्ट्री फार्म में इतनी ज्यादा मुर्गियां है कि इनके दुर्गंध भरे गोवर के ढेर लगे हुए हैं, जिसके कारण हवा में उनकी बदबू और मक्खियों ने काफी परेशान कर रखा है। उनका कहना है कि ना ही तो वह अपने आंगन में बैठ सकते हैं, ना ही वह अपने घर के अंदर बैठकर खाना तक खा सकते हैं। उन्होंने दुखी हृदय से कहा कि उनका सोना, उठना, बैठना, खाना पीना सब मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा कि जो मुर्गियों के बच्चे मर जाते हैं, आवारा कुत्ते उन्हें उठाकर हमारे घरों के आसपास लाकर फेंक देते हैं, ऐसे में हमने कई बार इकट्ठा होकर पंचायत और प्रशासन से भी गुहार लगाई है कि इस पोल्ट्री फार्म को या तो यहां से हटाया जाए, या फिर इसको किसी अन्य जगह पर शिफ्ट किया जाए, ताकि लोगों को गंदगी का सामना न करना पड़े। इतना ही नहीं, गांव वासियों ने बताया कि उनके घरों के साथ ही करीब 200 मीटर की दूरी पर बिना किसी अनुमति के दूसरा पोल्ट्री फार्म खोल दिया गया है, जबकि वह अवैध रूप से खोला गया है, लेकिन रिहायशी आबादियों में प्रकृति हवाओं के बीच दुर्गंध फैलाने वालों को रोकने वाला कोई नहीं है, ग्रामीणों का आरोप है कि इन दोनों पोल्ट्री फार्मो पर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने पर उचित कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है, ना तो संबंधित पंचायत सुनवाई कर रही है और ना ही जिला प्रशासन पंचायत को कार्यवाही करने के आदेश दे रहा है। ऐसे में गांव वासियों ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन से अपने स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने हेतु गुहार लगाई है। वहीं ग्राम पंचायत चरोला के प्रधान सौरभ ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पोल्ट्री फार्म संचालक को अपने फार्म को साफ सुथरा रखने की कई बार हिदायतें दे रखी है लेकिन अगर ऐसा हो रहा है तो वह लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता अभियान के साथ धोखा है, उन्होंने कहा कि पूर्व पंचायत द्वारा कुछ मुर्गीयां पालने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दिया गया है ना कि पोल्ट्री फार्म खोलने के लिए। उन्होंने माना कि उपरोक्त दोनों पोल्ट्री फार्म जांच का विषय है, वह जल्द ही इसका समाधान निकालेंगे। वहीं लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर जब डीसी ऊना जतिन लाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला ध्यान में आया है, अगर आबादियों के बीच पोल्ट्री फार्म खोला गया है तो यह जांच का विषय है, क्योंकि लोगों के स्वास्थ्य और स्वच्छता के ऊपर लापरवाही कदापि सहन नहीं की जाएगी।वह जल्द ही संबंधित विभाग को इसकी जांच के आदेश देंगे।

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