वन विभाग की अंब रेंज की गश्ती टीम ने नियमित निगरानी अभियान के दौरान बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी का अवैध परिवहन कर रहे दो वाहनों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। मामले में संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ वन एवं वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गई है तथा पुलिस थाना अंब में प्राथमिकी (एफआईआर) भी दर्ज करवाई गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार 3 जून 2026 को अंब रेंज की गश्ती टीम नियमित गश्त एवं निगरानी कार्य पर थी। टीम में उप वन रक्षक (ब्लॉक अधिकारी ज्वार) विजय कुमार, उप वन रक्षक मुनीश कुमार, वन रक्षक एवं प्रभारी ज्वार बीट विजय कुमार तथा वन रक्षक एवं प्रभारी नेहरी बीट वीरेंद्र कुमार शामिल थे। गश्त के दौरान सायं लगभग 5:15 बजे अंब चौक के निकट टीम को दो संदिग्ध वाहन दिखाई दिए। संदेह के आधार पर वाहनों को रोककर जांच की गई। जांच के दौरान वाहन संख्या HP 55D 6399 तथा HP 24D 0942 की तलाशी ली गई। निरीक्षण में पाया गया कि दोनों वाहनों में प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था। वन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर ही वाहन चालकों से लकड़ी के परिवहन से संबंधित वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा, लेकिन चालक किसी भी प्रकार के वैध दस्तावेज दिखाने में असफल रहे। दस्तावेज न होने और प्राथमिक जांच में अवैध परिवहन की पुष्टि होने पर वन विभाग की टीम ने दोनों वाहनों को अपने कब्जे में लेकर रेंज कार्यालय अंब पहुंचाया। वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित वाहन चालकों के खिलाफ वन एवं वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस थाना अंब में एफआईआर दर्ज करवा दी गई है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार मामले की विस्तृत जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि प्रतिबंधित प्रजाति की लकड़ी कहां से लाई गई थी तथा इसे किस स्थान तक पहुंचाया जाना था। वन विभाग का कहना है कि वन संपदा और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विभाग पूरी तरह सतर्क एवं प्रतिबद्ध है। अवैध कटान, तस्करी और वन संपदा के अवैध परिवहन से जुड़े मामलों में भविष्य में भी इसी प्रकार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। रेंज ऑफिसर वन विभाग राहुल ठाकुर ने लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें कहीं वन संपदा से जुड़े किसी अवैध कार्य की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत वन विभाग को दें, ताकि समय रहते उचित कार्रवाई की जा सके। इस कार्रवाई को वन विभाग की अवैध लकड़ी तस्करी के खिलाफ चल रही मुहिम में एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, जिससे वन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।