किसानों के लिए खुशखबरी है। कृषि अनुसंधान उप केंद्र अकरोट के वैज्ञानिकों ने बिना खेत जोते पराली में आलू उगाने की सफल तकनीक विकसित कर एक नई मिसाल पेश की है। इस नवाचार से आलू उत्पादकों को लागत में भारी कमी, श्रम की बचत और बेहतर उत्पादन का लाभ मिलेगा। कृषि वैज्ञानिकों ने नमी युक्त खेत में आलू के बीजों को सीधे जमीन के ऊपर रखा और लगभग पौने फीट मोटी धान की पराली से ढक दिया। इस तकनीक में न तो खेत की जुताई की जरूरत पड़ती है, न ही मेंढ़-नाली बनाने या आलू पर मिट्टी चढ़ाने की। खास बात यह है कि फसल तैयार होने पर आलू निकालने के लिए खेत खोदना भी नहीं पड़ता। जहां सामान्य तरीके से आलू की फसल में हर 10–12 दिन बाद सिंचाई करनी पड़ती है, वहीं इस तकनीक में केवल तीन बार पानी देने से फसल तैयार हो जाती है। इससे पानी की बचत के साथ-साथ सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होता है। धान की पराली से मल्चिंग होने के कारण खरपतवार उगने की संभावना बेहद कम रहती है। इसलिए इस विधि में किसी भी प्रकार के खरपतवारनाशी रसायन का छिड़काव नहीं किया गया। इससे उत्पादन लागत घटती है और आलू स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अधिक सुरक्षित व लाभदायक बनता है।