धार्मिक नगरी चिंतपूर्णी में बाजार और चिंतपूर्णी-भरवाई मार्ग पर घूम रहे बेसहारा पशु श्रद्धालुओं, स्थानीय लोगों और वाहन चालकों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में व्यस्त बाजार और मुख्य सड़क पर पशुओं की मौजूदगी से दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। गंगोट पंचायत के पूर्व प्रधान राकेश समनोल ने मंदिर न्यास और जिला प्रशासन से मांग की है कि बाजार और मुख्य मार्ग पर घूम रहे बेसहारा पशुओं को जल्द से जल्द हटाकर मंदिर न्यास की गौशाला में रखा जाए। उनका कहना है कि कई बार पशु सड़क के बीच खड़े हो जाते हैं, जिससे यातायात बाधित होता है और राहगीरों को भी जोखिम उठाना पड़ता है। राकेश समनोल ने बताया कि इस संबंध में क्षेत्र की तीन पंचायतों के प्रधानों और मंदिर ट्रस्टी के माध्यम से उपायुक्त ऊना जतिन लाल के समक्ष भी मामला उठाया जा चुका है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए समय रहते ठोस कदम उठाना जरूरी है। उन्होंने बताया कि करीब एक माह बाद शुरू होने वाले सावन अष्टमी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालु मां चिंतपूर्णी के दरबार में पहुंचते हैं। ऐसे में यदि बाजार और मुख्य मार्ग पर बेसहारा पशु इसी तरह घूमते रहे तो किसी भी समय हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से मेले से पहले विशेष अभियान चलाकर इन पशुओं को सुरक्षित स्थान पर भेजने और बाजार क्षेत्र को पशु मुक्त बनाने की मांग की है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए समय रहते प्रभावी व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि मेले के दौरान यातायात और भीड़ प्रबंधन में किसी प्रकार की बाधा न आए।