राष्ट्रीय स्तरीय मां शूलिनी मेले में पारंपरिक ठोडा खेल का आयोजन किया जा रहा है। इसमें छह टीमें भाग ले रही हैं। पॉइंट के आधार पर इसमें अंक दिए जाएंगे और विजेता टीम को ट्रॉफी व नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। ठोडा नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि शौर्य और कौशल का खेल है। इसमें विशेष पारंपरिक लिबास पहने खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। ये खिलाड़ी न केवल विरोधी दल के तीरों के तीखे आक्रमण को झेलते हैं, बल्कि पलक झपकते ही अपने धनुष-बाण से उसका करारा जवाब भी देते हैं। इस खेल के नियम बेहद कड़े हैं, यदि कोई खिलाड़ी थककर मैदान से बाहर हो जाता है, तो उसे पराजित माना जाता है। इसके अलावा, खेल की गरिमा बनाए रखने के लिए पैर पर तीर मारना फाउल माना जाता है।