भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश शिमला और जिला प्रशासन सोलन के सहयोग से सोलन थिएटर फेस्टिवल का समापन हुआ। अनुकृति रंगमंडल कानपुर के कलाकारों ने कला केंद्र कोठों में दो नाटकों का मंचन किया। ये नाटक 'गांधारी' और 'जामुन का पेड़' थे। दोनों नाटकों ने दर्शकों को महत्वपूर्ण सामाजिक संदेश दिए। लेखक जयवर्धन के नाटक 'गांधारी' का निर्देशन डॉ. ओमेंद्र कुमार ने किया। इसमें दिखाया गया कि युद्ध से किसी को कुछ भी हासिल नहीं होता। हस्तिनापुर में धृतराष्ट्र के नेत्रहीन होने के कारण पांडु को राज्य की जिम्मेदारी मिली। भीष्म ने गांधार पर आक्रमण कर नरेश सुबल को बंदी बनाया। उन्होंने राजकुमारी चारुवदनी का विवाह धृतराष्ट्र से करने का प्रस्ताव रखा। राज्य हित में सुबल ने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया। गांधारी ने पति के नेत्रहीन होने पर अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का संकल्प लिया। दुर्योधन के कारण हुए महाभारत युद्ध में गांधारी के 99 पुत्र मारे गए। अंत में गांधारी ने कृष्ण को शाप दिया और युद्ध के निरर्थक होने का निष्कर्ष निकाला। यह नाटक महाभारत के प्रमुख पात्रों के माध्यम से युद्ध की विभीषिका दर्शाता है। गांधारी के सौ पुत्रों का जन्म और फिर द्यूत क्रीड़ा में युधिष्ठिर का सब कुछ हारना दिखाया गया। द्रौपदी के चीरहरण और अपमान के बाद भीष्म, द्रोण, युधिष्ठिर, अर्जुन और भीम के मौन रहने पर कृष्ण को पुकारा गया। कृष्ण ने दुर्योधन को चेतावनी दी, पर युद्ध नहीं टला। गांधारी ने भी दुर्योधन को समझाने का प्रयास किया। युद्ध के बाद अपने 99 पुत्रों को खोने के बाद गांधारी ने अपनी आंखों की पट्टी खोली। कृष्ण चंदर की लोकप्रिय व्यंग्यात्मक कहानी 'जामुन का पेड़' का मंचन भी हुआ। यह नाटक लाल फीताशाही और नौकरशाही की उदासीनता पर करारा कटाक्ष करता है। एक जामुन के पेड़ के नीचे दबे व्यक्ति की जान बचाने की कोशिशें फाइलों और अनुमतियों के चक्कर में नाकाम रहीं। अंततः उस व्यक्ति की मौत हो जाती है। माली आम आदमी का प्रतीक है जो मदद करना चाहता है। बाकी सभी नियम-कानून और जिम्मेदारी टालने में लगे रहते हैं। कृष्णा सक्सेना, सम्राट और आकाश ने इस कहानी का नाट्य रूपांतरण किया।