जिला मुख्यालय नाहन में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पतंगबाजी की ऐतिहासिक परंपरा आज भी कायम है। रियासतकाल से चली आ रही इस परंपरा को शहर के शौकीन आज भी पूरी शिद्दत के साथ निभा रहे हैं, हालांकि समय के साथ इसके क्रेज में जरूर कमी आई है। बाजार में साधारण और फैंसी पतंगे 5 रुपये से लेकर 70 रुपये प्रति पीस तक बिक रही हैं। कभी 30 से 50 रुपये प्रति हजारा मिलने वाली डोर अब 100 से 150 रुपये प्रति हजारा तक पहुंच गई है। पर्व से कुछ दिन पहले ही शहर के बाजारों में पतंगों और चरखियों की बिक्री जोर पकड़ चुकी है। गौरतलब रहे कि दो-तीन दशक पहले पतंगबाजी का दौर रक्षाबंधन से दो-तीन महीने पहले ही शुरू हो जाता था, जो अब घटकर केवल पर्व के आसपास के कुछ दिनों तक सिमट गया है। पहले शहर के हर घर की छत से रंग-बिरंगी पतंगें आसमान में उड़ती नजर आती थीं, लेकिन अब छतों पर उतनी भीड़ नहीं दिखती। भले ही पहले जैसा रोमांच और आसमान में पतंगों का सैलाब अब नजर न आता हो, फिर भी इस हुनर के चुनिंदा दीवाने इस पुरानी परंपरा को पूरी शान से जिंदा रखे हुए हैं।