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Sirmour: खेड़ा मंदिर का निर्माण करके चारों और बसाया गया था नाहन शहर, राजवंश सदस्या दिव्यश्री ने दी जानकारी

साल 2008 में मेरे पिता महाराज उदय प्रकाश ने शाही महल के कपाट के साल में एक बार खोलने का निर्णय लिया था। ताकि शहरवासी महल स्थिति खेड़ा महाराज के प्राचीन मंदिर में आकर उनके दर्शन कर सकें। देर शाम को यह जानकारी राजवंश की सदस्या दिव्यश्री ने दी। दिव्यश्री ने बताया कि पिता के देहांत के बाद भी साल में एक बार शाही महल के दरवाजे आमजन के लिए खोले जा रहे हैं ताकि वह खेड़ा महाराज के दर्शन कर सकें। उन्होंने खेड़ा मंदिर और शाही महल स्थित पीपल के पेड़ की ऐतिहासिक जानकारी भी सांझा की। दिव्यश्री ने बताया कि 1621 में महाराज कर्मप्रकाश सिरमौर रियासत के लिए नई राजधानी तलाश कर रहे थे। उस दौरान खेड़ा महाराज उनको पीपल के पेड़ में साधना में लीन मिले। खेड़ा महाराज ने महाराज से कहा कि मेरी स्थापना यहां पर करें और पूरा शहर मेरे चारों ओर बसेगा। इस तरह खेड़ा महाराज की स्थापना यहां हुई। इसके बाद उनको जगन्नाथ मंदिर में भी स्थापित किया गया।

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