मिनी जू रेणुकाजी में वन्यजीवों के उपचार और संरक्षण के लिए आधुनिक वैटनरी अस्पताल का निर्माण किया जा रहा है। वन्य प्राणी विभाग की ओर से करीब 28 लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस अस्पताल का 80 फीसदी कार्य पूरा हो चुका है। अस्पताल के शुरू होने से घायल और बीमार जंगली जानवरों को बेहतर उपचार सुविधा मिल सकेगी। करीब 7,500 वर्ग मीटर क्षेत्र में विकसित किए जा रहे इस अस्पताल में ऑपरेशन थिएटर (ओटी), प्रयोगशाला (लैब), उपचार कक्ष और दवाओं के भंडारण की व्यवस्था होगी। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक, फार्मासिस्ट समेत पांच कर्मचारी तैनात रहेंगे। अस्पताल के संचालन से गंभीर रूप से घायल वन्यजीवों को उपचार के लिए शिमला के डूडीकंडी केंद्र नहीं भेजना पड़ेगा। रेणुकाजी व आसपास के क्षेत्रों से रेस्क्यू किए गए जानवरों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा। विशेष बात यह है कि भवन का निर्माण पारंपरिक कंक्रीट के बजाय आधुनिक फाइबर तकनीक से किया जा रहा है, जो वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र के नियमों के अनुरूप है। वातानुकूलित भवन में स्ट्रेचर के माध्यम से जानवरों को अंदर तक ले जाने की सुविधा भी उपलब्ध होगी। भविष्य में अस्पताल के विस्तार की संभावना को ध्यान में रखकर इसका डिजाइन तैयार किया गया है। वन्य प्राणी वन मंडल शिमला के डीएफओ डॉ. शहनवाज अहमद भट्ट ने बताया कि रेणुकाजी में वन्यजीवों के उपचार के लिए आधुनिक वैटनरी अस्पताल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। रेणुकाजी में टाइगर जोड़ा लाए जाने के साथ ही अस्पताल का उद्घाटन भी करवाया जाएगा। विभाग वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी अन्य योजनाओं पर भी चरणबद्ध तरीके से कार्य कर रहा है।