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सिरमौर: मजहब की दीवारों से ऊंचा हुनर, मुस्लिम कारीगरों के हाथों सजेगा नाहन का दशहरा

त्योहारों की असली खूबसूरती आपसी प्रेम, सम्मान और भाईचारे में छिपी होती है। हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक शहर नाहन में दशहरे की तैयारियां इसी साझा संस्कृति की मिसाल पेश कर रही हैं। यहां हिंदुओं के प्रमुख पर्व दशहरे के लिए उत्तर प्रदेश के शामली से आने वाला एक मुस्लिम कारीगर परिवार वर्षों से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले तैयार करता आ रहा है। दशहरे के दिन ये पुतले बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में जलाए जाएंगे। पुतलों को आकार देने वाले कारीगरों की मेहनत त्योहारों से जुड़े सामाजिक सौहार्द और गंगा-जमुनी तहजीब का संदेश भी दे रही है। उत्तर प्रदेश के शामली जिले के थाना कस्बे के निवासी मोहम्मद सद्दाम और सलीम अहमद का परिवार दशहरे से करीब नौ-दस दिन पहले नाहन पहुंच जाता है। परिवार के नौ से दस सदस्य दिन-रात मेहनत कर तीनों पुतलों को तैयार करने में जुटे हैं। इस बार भी कारीगर देर रात तक काम कर पुतलों को अंतिम रूप दे रहे हैं। पुतले बनाना इस परिवार का पुश्तैनी पेशा है। यह काम उनके लिए रोजी-रोटी कमाने के साथ दशहरे के आयोजन में योगदान देने का माध्यम भी है। कारीगर पुतलों को आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए लगातार मेहनत करते हैं। दशहरे के दिन जब इन पुतलों का दहन होता है, तो परिवार को अपनी मेहनत सफल होने की खुशी मिलती है। इस बार तीनों पुतलों में आतिशबाजी लगाने का काम भी यही परिवार कर रहा है। पुतलों में 700 से अधिक पटाखे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। परिवार के सभी सदस्य निर्माण कार्य में जुटे हैं, ताकि दशहरे के दिन तैयारियां पूरी रहें। पुतलों के दहन के दौरान होने वाली आतिशबाजी और रंग-बिरंगी रोशनी उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेंगी। ऐतिहासिक नाहन शहर के चौगान मैदान में दशहरा धूमधाम से मनाया जाएगा। यहां 40 फीट ऊंचे रावण, 35 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 30 फीट ऊंचे मेघनाद के पुतलों का दहन होगा। नगर परिषद नाहन के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार के अनुसार, पुतलों के निर्माण पर करीब 1.50 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। आतिशबाजी और अन्य व्यवस्थाओं के लिए अलग बजट रखा गया है। पूरे आयोजन पर करीब पांच लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। नाहन का दशहरा यह संदेश देता है कि त्योहारों की खुशियां किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं होतीं। अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी कला, मेहनत और भागीदारी से उत्सवों को खास बनाते हैं। जब चौगान मैदान में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले अग्नि के हवाले होंगे, तो उनमें इन कारीगरों की मेहनत भी शामिल होगी। पुतले कुछ ही पलों में राख हो जाएंगे, लेकिन उनके निर्माण से जुड़ा आपसी सम्मान, साझा संस्कृति और भाईचारे का संदेश लोगों के दिलों में लंबे समय तक बना रहेगा। नाहन का यह आयोजन याद दिलाता है कि कला और हुनर की कोई धार्मिक सीमा नहीं होती। इंसानियत, सहयोग और आपसी सद्भाव ही किसी भी त्योहार की असली पहचान हैं।

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