रेणुकाजी तीर्थ स्थित निर्वाण आश्रम के संस्थापक संत शिरोमणि ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण की 31वीं पुण्यतिथि मंगलवार को दिव्य स्मृति दिवस के रूप में श्रद्धा व सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने नम आंखों से महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी स्मृतियों को नमन किया। कार्यक्रम की शुरुआत महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण की प्रतिमा पर जलाभिषेक व पुष्प वर्षा से की गई। इसके बाद आयोजित संत समागम व श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न संत-महात्माओं ने उनके जीवन और आध्यात्मिक योगदान पर प्रकाश डाला। सभा की अध्यक्षता करते हुए हरिहर आश्रम नई दिल्ली के पीठाधीश्वर महात्मा सुयज्ञ मुनि महाराज ने कहा कि जो संत-महापुरुष परोपकार के लिए जन्म लेते हैं, उनका नाम सदैव अमर रहता है। उन्होंने कहा कि सद्गुरु के चरणों का आश्रय पाने वाले जीव का कभी पतन नहीं होता। जिस समाज या क्षेत्र में संतों का वास नहीं होता, वहां संस्कार कमजोर पड़ने लगते हैं। महामंडलेश्वर स्वामी जगदीश दास ने कहा कि संत महात्माओं में ही वह शक्ति होती है, जो अध्यात्म को जीवित रख सकती है। संतों के बिना धर्म, भक्ति, ज्ञान और अध्यात्म की कल्पना भी संभव नहीं है। निर्वाण आश्रम के संचालक एवं महंत महात्मा रेणेन्द्र मुनि ने कहा कि उन्होंने तप और साधना के बल पर रेणुकाजी तीर्थ में अध्यात्म की ज्योति प्रज्वलित की। उनकी स्मृतियां आज भी रेणुकाजी के कण-कण में बसती हैं। परोपकार, सेवा और सुमिरन ही उनके जीवन का मुख्य ध्येय था। श्रद्धांजलि सभा का मंच संचालन महात्मा कमल दास ने किया। इस दौरान संतों ने महात्मा सुंदरमुनि निर्वाण के बताए सद्मार्ग और सद्कर्मों को अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान भक्ति गीत-संगीत और प्रवचनों का आयोजन भी किया गया। इसके पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर महंत सेवा दास, सुशांत मुनि, महात्मा दामोदर शरण दास, गोविंद दास, महंत शांति दास, स्वामी अमर दास, महंत प्रद्युम्न मुनि, जनेन्द्र मुनि, महात्मा दीनदयाल पुरी, महंत श्याम दास, महात्मा राघवेंद्र दास, महात्मा केवल्यानंद, बलवंत दास, महात्मा सेवा दास, महात्मा सूर्यवंश दास सहित उत्तर भारत से आए अनेक संत-महात्मा आदि मौजूद रहे।