जिला सिरमौर के दो गांवों में लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं। यहां बीती बरसात में पूरा पहाड़ खिसकने व भूमि में दरारों के चलते मकानों में दरारें आ गई हैं। बरसात के दिनों में तो इन लोगों को एक-दो महीने के लिए शिफ्ट किया गया, लेकिन बाद में ग्रामीण डर के साये में जीने को मजबूर हैं। सिरमौर दौरे के दौरान मामला संज्ञान में आते ही राजस्व मंत्री ने जिला प्रशासन को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि आपदा अधिनियम में काफी शक्तियां अधिकारियों को उपलब्ध हैं, ऐसे में प्रभावितों को राहत प्रदान की जाए। बता दें, जिला सिरमौर के संगड़ाह उपमंडल के चौकर गांव व नाहन उपमंडल के अगड़ीवाला गांव में बीते वर्ष भारी बरसात से काफी नुकसान हुआ था। चौकर व अगड़ीवाला दोनों गांवों में साथ लगता पूरा पहाड़ खिसक गया था। ऐसे में मकानों में दरारें आ गई। चौकर गांव में 7 तो वहीं अगड़ीवाला गांव में भी 7-8 परिवारों को संकट पैदा हो गया। इसके बाद प्रशासन की तरफ से लोगों की सुरक्षा को देखते हुए एक-दो महीने के लिए इन्हें सरकारी स्कूलों आदि में शिफ्ट कर दिया गया। बरसात खत्म होने के बाद जमीन आदि नहीं मिलने पर लोगों को पुन अपने घरों में लौटना पड़ा। ऐसे में दरारों वाले मकानों में परिवार रहने को मजबूर हैं। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी के सिरमौर दौरे के दौरान चौकर गांव के निवर्तमान प्रधान शशीभूषण सहित ग्रामीणों जोगेंद्र, चेतराम, कमलराज आदि प्रभावित लोग उनसे मिले। समस्या को उनके समक्ष रखा। ग्रामीणों ने बताया कि उनके मकानों को आंशिक नुकसान दर्शाया है। ऐसे में उन्हें शिफ्ट नहीं किया जा सका। आपदा के करीब 8 महीने बीत जाने के बाद भी ग्रामीण डर के साये में दरारों वाले मकानों में रहने को मजबूर हैं। बरसात में पूरा पहाड़ खिसकने से काफी नुकसान हुआ है। अब यदि भविष्य में भारी बारिश होती है तो काफी नुकसान हो सकता है। इतना ही नहीं विधायक अजय सोलंकी ने भी इस दौरान कहा कि आंशिक नुकसान की रिपोर्ट मिलने से समस्या आ रही है। मकान रहने लायक नहीं हैं, लेकिन लोगों को रहना पड़ रहा है।