भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआईएम) के जिला सचिव राजेंद्र ठाकुर ने केंद्र सरकार की प्रस्तावित ट्रेड डील का विरोध करते हुए कहा कि इससे देश की खेती, बागवानी और डेयरी उद्योग को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। उन्होंने दावा किया कि न्यूजीलैंड, अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ किए जा रहे व्यापार समझौते किसानों और बागवानों के हितों के खिलाफ हैं। मीडिया से बातचीत में राजेंद्र ठाकुर ने आरोप लगाया कि इन व्यापार समझौतों के तहत विदेशी कृषि उत्पाद, डेयरी उत्पाद और विदेशी सेब बिना कस्टम ड्यूटी के भारतीय बाजारों में आने लगेंगे। उनका कहना था कि इससे स्थानीय किसान, दूध उत्पादक और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हुआ तो किसानों और बागवानों को अपनी उपज बेहद कम कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सीपीआईएम नेता ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि ये फैसले कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक साबित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का लाभ विदेशी कंपनियों को मिलेगा, जबकि भारतीय किसान और डेयरी उत्पादक प्रभावित होंगे। राजेंद्र ठाकुर ने हाल ही में हुए एक प्रदर्शन के दौरान युवाओं पर पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है और सरकार को संवाद के जरिए समस्याओं का समाधान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों, युवाओं और आम जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सीपीआईएम अब आंदोलन तेज करेगी। इसी क्रम में पार्टी ने 10 अगस्त से देशभर में जेल भरो आंदोलन शुरू करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरकार की नीतियों के विरोध में लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।