हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर का गिरिपार क्षेत्र पारंपरिक रीति-रिवाजों के लिए भी प्रदेश में जाना जाता है। खान-पान की बात हो या पारंपरिक त्योहार हो, सभी त्योहारों में लोगों में खूब उत्साह देखने को मिलता है। इसक उदाहरण पच्छाद क्षेत्र के कंडा गांव में देखने को मिला। यहां पर प्राचीन शिरगुल महाराज के मंदिर में पहली बार शांद पर्व बड़े धूमधाम से मनाया गया। साथ में मंदिर की छत पर कुरुड़ भी स्थापित की गई। इस मौके पर ढोल-नगाड़ों व शहनाइयों की स्वर लहरियों के साथ कई देवी-देवताओं की पालकियां शांद में पहुंचीं। वहीं, हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। शिरगुल महाराज का जयकारा लगाते रहे और देवता के गण अठखेलियां करते रहे। यहां के कुल देवता शिरगुल महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को अपना आशीर्वाद देते हैं। शांद पर्व के अवसर पर जिला सिरमौर के अलावा अन्य क्षेत्रों से भी श्रद्धालुओं ने शिरकत की। गौरतलब है कि यह महायज्ञ कई पीढ़ियों से मनाया जा रहा है। इस पर्व में शिरगुल महाराज के समस्त अनुयायी और विभिन्न क्षेत्रों के लोग अपनी उपस्थति दर्ज करवाते हैं। यहां पर विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाता है, जिसे दूर-दूर से आए लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। माना जाता है कि शांद महायज्ञ क्षेत्र में सुख-समृद्धि, खुशहाली एवं रक्षा के लिए किया जाता है। शांद महायज्ञ में पारंपरिक देव स्तुति व ढोल-नगाड़ों की मधुर ध्वनियों ने पूरा क्षेत्र गूंज उठा।