शिमला में क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों के साथ कथित बदसलूकी के विरोध में गुरुवार को एसएफआई रामपुर इकाई ने प्रदर्शन किया। महाविद्यालय परिसर में आयोजित प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रदर्शन की अध्यक्षता एसएफआई रामपुर इकाई के अध्यक्ष मीना राम ने की। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने 'शिक्षा बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' और 'छात्रों की आवाज दबाना बंद करो' जैसे नारे लगाए। मीना राम ने आरोप लगाया कि शिमला में उपायुक्त कार्यालय के बाहर शांतिपूर्ण तरीके से भूख हड़ताल कर रहे एसएफआई कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोगों ने धक्का-मुक्की और बदसलूकी की। उन्होंने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था, नीट पेपर लीक सहित सभी परीक्षा घोटालों की उच्च स्तरीय जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) में सुधार, शिक्षा व्यवस्था से भ्रष्टाचार और निजीकरण खत्म करने तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। एसएफआई के सचिव राहुल विद्यार्थी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले छात्रों पर हमला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधा प्रहार है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को दबाने के बजाय सरकार को छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। एसएफआई रामपुर इकाई ने प्रशासन से शिमला की घटना की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और आंदोलनरत छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही संगठन ने नीट पेपर लीक सहित सभी परीक्षा घोटालों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा देने की भी मांग उठाई।