लूहरी जलविद्युत परियोजना वर्कर यूनियन ने मोदी सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। चार लेबर कोड को एकतरफा लागू करने के खिलाफ गेट मीटिंग में लेबर कोड की प्रतियां जलाकर रोष जताया। सीटू जिलाध्यक्ष कुलदीप सिंह, सचिव दिनेश मेहता, यूनियन अध्यक्ष राजपाल, पिंकू और मिलाप नेगी ने कहा है कि भारत सरकार की ओर से अधिसूचित चारों लेबर कोड मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों, सुरक्षा, वेतन और सामाजिक सुरक्षा को कमजोर करते हैं। पूंजीपति वर्ग के पक्ष में श्रम कानूनों को पुनर्गठित करने की कोशिश है। इन कोडों से संगठित व असंगठित, दोनों क्षेत्रों के मजदूरों पर ठेका और अस्थायी रोजगार का बोझ बढ़ेगा। ट्रेड यूनियन गतिविधियां कठिन होंगी और श्रम कल्याण की अवधारणा संकुचित होगी। केंद्र सरकार ने 29 श्रम कानूनों को निरस्त करके वेतन कोड 2019, औद्योगिक संबंध कोड 2020, सामाजिक सुरक्षा कोड 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य स्थिति कोड 2020 चार लेबर कोड बनाए हैं। चार लेबर कोड को मजदूर संगठनों के विरोध और बुनियादी आपत्तियों को अनसुना करके एकपक्षीय ढंग से लागू किया गया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का मजाक है। उन्होंने मांग की है कि इन कोडों को तत्काल वापस लिया जाए। पुराने श्रम कानूनों को बहाल कर मजदूरों के हित में वैज्ञानिक संशोधन किए जाएं और भारतीय श्रम सम्मेलन सहित सभी प्रतिनिधि मंचों पर व्यापक चर्चा के बाद ही कोई भी श्रम सुधार लागू किया जाए। मजदूर नेताओं ने कहा कि 26 नवंबर को लेबर कोड लागू करने के खिलाफ, हर काम की जगह पर, लेबर कोड को खत्म करने और श्रम शक्ति नीति 2025 के ड्राफ्ट को वापस लेने के खिलाफ रामपुर में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।