सीपीआईएम हिमाचल प्रदेश की राज्य कमेटी की ओर से जनता के ज्वलंत मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा जत्था मार्च बुधवार को रामपुर पहुंचा। इस जत्थे के माध्यम से केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद कीा गई। यह जत्था आगे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी जाकर जनता से संपर्क करेगा। इस जत्थे के माध्यम से नुक्कड़ नाटक और जनसभा का आयोजन किया गया। इस जनसभा को सीपीएम राज्य सचिव संजय चौहान, राज्य सचिवालय सदस्य राकेश सिंघा, देवकी नंद और कुलदीप ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज केंद्र की भाजपा सरकार राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) को खत्म करने की कोशिश कर रही है, जो हिमाचल प्रदेश के अस्तित्व और अधिकारों पर सीधा हमला है। मजदूरों के लिए बने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड वापस लाने से मजदूरों को गुलाम बनाने के मकसद से लाए गए हैं। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रद्द करने, मनरेगा को बहाल करने, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाना बंद करने, किसानों को 5 बीघा जमीन देने, दूध का घोषित समर्थन मूल्य तय करने, आपदा प्रभावितों को जमीन देने, परियोजना प्रभावित किसानों की लंबित मांगों को पूरा करने, आपदा प्रभावितों को मुआवजा देने तथा आरडीजी को बहाल करने की मांगें प्रमुख रूप से शामिल रही। उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी और सांप्रदायिक मोदी सरकार के मंसूबों को किसी भी कीमत पर पूरा नहीं होने दिया जाएगा। नेताओं ने कहा कि यह जत्था प्रदेशभर में जनता के बीच व्यापक जनजागरण अभियान चलाएगा। इसके माध्यम से केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक किया जाएगा और मजदूरों, किसानों और आम जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह अभियान 24 मार्च को दिल्ली में होने वाली जन आक्रोश रैली की तैयारी का भी हिस्सा है। हिमाचल प्रदेश से हजारों लोग दिल्ली के लिए रवाना होंगे और मजदूर-किसान विरोधी नीतियों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस मौके पर प्रेम चौहान, रणजीत, मिलाप, पूर्ण ठाकुर, राजीव, काकू, विजय, कृष्णा राणा, आशा, ललिता, मंजू, ममता, कमलेश, परमिंदर, राहुल, अनिल, नील दत्त, सरोजना, जोगिंदर, रूप, इस्माइल सहित अन्य मौजूद रहे।