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VIDEO : सीटू से संबंधित मिड-डे मील वर्कर्ज यूनियन ब्लॉक यूनिट रामपुर की बैठक आयोजित

अंकेश डोगरा Updated Mon, 31 Mar 2025 03:22 PM IST

सीटू से सबंधित मिड-डे मील वर्कर्ज यूनियन ब्लॉक यूनिट रामपुर की बैठक किसान मजदूर भवन चाटी में आयोजित की गई। बैठक में सीटू शिमला जिला सचिव अमित, यूनियन ब्लॉक यूनिट की अध्यक्षा राधा देवी, महासचिव सुरजा देवी, कोषाध्यक्ष ममता, लछू देवी, कुसुम, राजकुमारी, नीलम, मान दास, लीला देवी, सुधीरा, सत्या, विमला देवी, रजनी, बबीता, कृष्णा, जनका, हेम लता, सुमित्रा, देव कन्या, आशा, मीना, मीरा सहित अन्य मिड-डे मील वर्कर मौजूद रहे। बैठक में 20 मई 2025 की हड़ताल को सफल बनाने की योजना बनाई गई। बैठक को सम्बोधित करते हुए रामपुर ब्लॉक की अध्यक्षा राधा देवी ने कहा कि मिड-डे मील वर्कर्ज का इस महंगाई के दौर में परिवार का जीवन बसर करना मुश्किल हो गया है। हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा बजट में मिड डे मील वर्करों के मानदेय में मात्र 500 रुपये की बढ़ोतरी मिड डे मील वर्करों के साथ मज़ाक है। इस महँगाई के दौर में यह मानदेय बहुत कम है। प्रदेश सरकार ने 1094 स्कूल बंद कर दिए और सरकार की युक्तिकरण नीति से कम विद्यार्थियों वाले 1500 स्कूल बंद होने है। सरकार द्वारा मिड डे वर्कर्स का रोजगार छीना जा रहा है। हिमाचल हाई कोर्ट के 31अक्टूबर 2019 और 2024 के निर्णय अनुसार मिड डे मील वर्कर्स दस महीने के बजाए बारह महीने का वेतन नहीं दिया जा रहा है, प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देने का काम किया है। रामपुर ब्लॉक की अध्यक्षा राधा देवी ने कहा कि केंद्र की सरकार ने मिड डे मील वर्करों के वेतन में 2009 के बाद से कोई वृद्धि नहीं की गई है, यहां तक कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा मासिक वेतन को अंतर्राष्ट्रीय श्रम सम्मेलन 2013 की सिफारिशों के अनुसार दो वर्षों में ₹1,000 से ₹3,000 तक बढ़ाने का लिखित आश्वासन दिया था। केंद्र सरकार नई शिक्षा नीति लेकर आई है, जिसके चलते बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद हो जाएंगे। केंद्रीय बजट 2025-26 के लिए मिड-डे मील योजना के लिए केवल 12,500.00 करोड़ रुपये आबटन कियता गया जो कि 2022-23 में आवंटित 12,800 करोड़ रुपये से कम है। मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार केन्द्रीय किचन खोलने की निति लागु कर रही है। मिड डे मील योजना को कई राज्यों में अक्षय पात्रा, नन्दी फाउंडेशन व इस्कॉन जैसे बड़े एनजीओ को ठेके पर दिया जा रहा है। बच्चों के पोषाहार पर आने वाले खर्चे को बच्चे की माता के खाते में डालने की मोदी सरकार की योजना व हाल ही में लाई गई कलस्टर योजना मिड डे मील वर्करज़ व लाभार्थी विरोधी है। खाद्य सुरक्षा जन अधिकार मंच झारखंड द्वारा 17 दिसम्बर 2023 को प्रकाशित सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि केन्द्रीय किचन की अपेक्षा पुरानी व्यवस्था सही थी। ज्यादातर छात्रों, अध्यापकों, मिड डे मील वर्करों व अन्य लाभार्थियों ने केन्द्रीय किचन व्यवस्था को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। केन्द्र सरकार लगातार जन विरोधी फैसले ले रही है।

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