फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rampur Bushahr: डंसा में पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं ने डाली नाटी, देवताओं के ऐतिहासिक मिलन ने खींचा ध्यान

परशुराम की चार ठहरियों में शामिल डमयापुरी डंसा में स्वतंत्रता दिवस का पर्व इस बार देशभक्ति के साथ स्थानीय देव परंपरा और लोक संस्कृति के रंग में भी नजर आया। मंदिर परिसर में दिनभर ढोल-नगाड़ों की थाप गूंजती रही और महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजधजकर नाटी डालकर उत्सव का माहौल बनाया। नोग युवक मंडल और परशुराम मंदिर समिति डंसा के संयुक्त आयोजन में कार्यक्रम की शुरुआत पंचायत प्रधान पदमा कुमारी और मुख्य अतिथि उपनिदेशक ऑडिट विभाग कृष्ण कुमार ने ध्वजारोहण कर की। इसके बाद विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियां आयोजित की गईं। मुख्य अतिथि कृष्ण कुमार ने आयोजन के बेहतर प्रबंधन के लिए युवक मंडल की सराहना की। उन्होंने युवाओं से नशे से दूर रहने और खेलकूद के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि युवाओं की सकारात्मक ऊर्जा का उपयोग समाज को बेहतर दिशा देने में किया जाना चाहिए। स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान डंसा में धार्मिक परंपराओं का भी विशेष रूप से निर्वहन किया गया। परशुराम मंदिर समिति की ओर से चार ठहरियों से पहुंचे देवताओं का पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ स्वागत किया गया। देवता साहिब दोगणू लालसा, जाहरू नाग शनेरी, योगेश्वर गुरु महाराज शिंगला और जाख देवता रचोली ने देवता साहिब दमुख डंसा की उपस्थिति में कार्यक्रम में शिरकत की। ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच देवताओं का स्वागत और उनका आपसी मिलन समारोह का प्रमुख आकर्षण रहा। मंदिर परिसर में महिला मंडलों की सदस्यों ने पारंपरिक वेशभूषा में नाटियां प्रस्तुत कीं। ढोल-नगाड़ों और स्थानीय वाद्य यंत्रों की धुन पर महिलाओं ने दिनभर नाटी डालकर लोक संस्कृति की झलक पेश की। स्कूली बच्चों और महिला मंडलों ने भी विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और युवाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन देशभक्ति के साथ क्षेत्र की समृद्ध देव संस्कृति और लोक परंपराओं का संगम बन गया।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें