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बालीचौकी: सेब की बढ़ती लागत और उचित दाम नहीं मिलने पर तेज करेंगे आंदोलन

सेब उत्पादक संघ लोक कला कमेटी बालीचौकी की बैठक थाची में शनिवार को ओमचंद की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सेब उत्पादन और जमीन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसान नेता महेंद्र राणा ने बताया कि सेब की खेती लगातार बढ़ती लागत के कारण अब घाटे का सौदा बनती जा रही है। खाद और दवाइयों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है, जबकि मंडियों में सेब के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। बैठक में कहा गया कि एक ओर सरकार की नीतियां किसान विरोधी बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदाएं भी सेब की खेती को लगातार नुकसान पहुंचा रही हैं। कभी कम बारिश तो कभी अधिक बारिश और आपदाओं के कारण इस वर्ष भी क्षेत्र के अधिकांश सेब बगीचों में ही सड़ गए। क्षेत्र में सेब का एक भी एकत्रीकरण केंद्र न होने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। महेंद्र राणा ने बताया सेब उत्पादक संघ ने निर्णय लिया कि अपनी मांगों को लेकर संगठन आने वाले समय में आंदोलन तेज करेगा। इसके तहत 1 जनवरी से गांव-गांव में बैठकें कर संगठन का विस्तार किया जाएगा। 8 जनवरी को नायब तहसीलदार थाची के माध्यम से प्रदेश सरकार को मांग पत्र सौंपा जाएगा और 19 जनवरी को बालीचौकी में रैली आयोजित की जाएगी। संघ की प्रमुख मांगों में सोमगाड़, थाची, पंजाईं, थाटा और गड़ागुसैन में पांच सेब एकत्रीकरण केंद्र खोलना, सेब के किराए को कानून के तहत तय करना और बाहर से आने वाले सेब पर शत प्रतिशत आयात शुल्क लगाना शामिल है। बैठक में ओमचंद, यदुनंदन राय, प्रकाश चंद, लाल चंद, देवेंद्र कुमार, वेदराम, पंकज कुमार व अन्य मौजूद रहे।

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