हिमाचल प्रदेश के पैरा वर्करों ने समय पर वेतन नहीं मिलने को लेकर प्रदेश सरकार के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की है। हिमाचल प्रदेश मल्टीपर्पज वर्कर कर्मचारी संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष विवेक ने बताया कि प्रदेश में पैरा वर्करों को 6,600 और मल्टीपर्पज वर्करों को 5,500 रुपये का मानदेय अदा किया जाता है। इस वेतन में इन्हें अपना घर भी चलाना है। परिवार की दवाइयों और अन्य जरूरतों को भी पूरा करना है। इस वेतन का आधा हिस्सा तो किराये में ही खर्च हो जाता है। जबकि बाकी बचे हिस्से से ही अपनी जरूरतों को पूरा करना पड़ता है। ऊपर से हैरानी की बात यह है कि ये वेतन भी समय पर नहीं मिल पाता। जिस कारण और ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है। विवेक ने बताया कि आज 16 तारीख यानी आधा महीना बीत जाने पर भी प्रदेश सरकार ने वेतन की अदायगी नहीं की है। जबकि नियमित कर्मचारियों को हर महीने समय पर वेतन दिया जाता है। सरकार अपने खर्चों और महंगी गाड़ियों के लिए खुलकर खर्च करती है। इन्होंने सरकार से पूछा है कि क्या इनके वेतन का बजट इतना अधिक हो गया है कि सरकार उसे अदा ही नहीं कर पा रही है। इन्होंने प्रदेश सरकार से पैरा वर्करों को समय पर वेतन देने की व्यवस्था करने के साथ ही इनके लिए पांच वर्षों वाली स्थायी नीति बनाने की मांग भी उठाई है।