अपर्याप्त बारिश-बर्फबारी होने से मंडी जिला के सेब उत्पादित क्षेत्रों में सेब पौधे नमी को तरस गए हैं। जमीन से नमी उठ जाने के कारण पहले सेब बगीचों में पौधे कई बीमारियों की चपेट में आ गए थे। वहीं अब सूखे से पर्याप्त नमी नहीं मिलने के कारण अप्रैल में होने वाली सेब फ्लावरिंग पर संकट छा सकता है। बागवानों के साथ बागवानी विशेषज्ञ भी सूखे से बने हालत से चिंतित हो उठे हैं। दिसंबर माह शुरू हो गया है लेकिन आसमान में बादल उमड़ नहीं रहे हैं। सेब बागवान देवालयों की शरण में जाने की तैयारी कर रहे हैं। सेब की भावी फसल के लिए चिलिंग आवर्स का होना बेहद जरूरी है। 1600 घंटे के चिलिंग आवर्स सेब पौधों के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन सूखे से यह हालात है कि बागवानों को बारिश तक नसीब नहीं हो पा रही है। बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज का कहना है कि इस समय सेब बगीचों को बेहद नमी की जरूरत हैं। अभी भी बारिश हो जाती है तो अप्रैल में होने वाली फ्लावरिंग के अच्छे संकेत मिल सकते हैं। मंडी जिला में 35 लाख सेब पेटी कारोबार होता है। सर्दी में सूखा और फ्लावरिंग के समय ठंड और बारिश सेब बागवानी को बिगाड़ रही है। मंडी जिला में करसोग, चुराग, पांगणा, ठंडा पानी, चरखडी, झूंगी, रोहांडा, कमांद, निहरी, शकोहर,थमाड़ी ,बाढु, कुटाहची, सरोआ, फंग्यार, जहल, सलाहर, कांढ़ा, बगस्याड, थुनाग, जंजैहली, छतरी, थाची और पंजाई समेत जिला के द्रंग इलाके में सेब के बगीचे हैं। जहां करोड़ों का सेब उत्पादित होता है। बागवानों चंद्रमणि, यशवंत, घनश्याम, मनोज, लाभ सिंह, प्रेम ठाकुर, हेमराज, दीनानाथ, परमा, हेम सिंह, लीला प्रकाश, दुष्यंत,जीत कुमार, सुरेंद्र और प्रकाश ठाकुर ने बताया कि बारिश और बर्फबारी नहीं होने से सेब बगीचों में नए पौधे लगाने और बागवानी संबंधी अभी कार्य ठप हो गए हैं।