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VIDEO : एक दशक का रिकॉर्ड टूटा, जंजैहली के कुथाह मेले में सिर्फ 4000 रुपये प्रति किलो बिकी गुच्छी

हिमाचल प्रदेश में गुच्छी के लिए मशहूर सिराज घाटी के जंजैहली में चल रहे जिला स्तरीय कुथाह मेले में गुच्छियों का भाव बुरी तरह लुढ़क गया है। 20 हजार प्रति किलो में बिकने वाली गुच्छी एक दशक बाद इस साल प्रति किलो चार हजार में बिकने लगी है। इससे ग्रामीणों की कमर तो टूट गई है। साथ में व्यापारी वर्ग के चेहरे भी लटक गए हैं। व्यापारी गुच्छी के दाम गिरने का कारण चीन से आयात होने वाली गुच्छी और पॉलीहाउस में तैयार होने वाली गुच्छी मान रहे हैं। इससे ग्रामीण लोग भी कम दाम मिलने से मायूस होने लग रहे हैं। जंजैहली घाटी में मनाए जाने वाले कुथाह मेले में हर वर्ष 50 लाख तक गुच्छी का कारोबार होता रहा है। लेकिन इस बार यह कारोबार पांच लाख रुपये तक भी नहीं पहुंच पाया है। कुथाह मेले में पहुंचे गुच्छी के व्यापारियों चमन शर्मा, गुलाब सिंह, रामेश्वर और मोहन सिंह ने पुष्टि करते हुए बताया कि गुच्छी के दाम चार हजार प्रति किलो चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे ग्रामीणों को तो नुकसान हुआ ही है। साथ में व्यापारियों को भी आर्थिक झटका लगा है। कुथाह मेले में इस बार कारोबार बेहद नीचे जा रहा है। अनेक व्यापारी मेला छोड़ वापिस निकल गए हैं। जंजैहली घाटी में कुथाह मेले का अपना अलग ही महत्व है। यह मेला जहां गुच्छियों के व्यापार के लिए प्रदेश व बाहरी प्रदेशों में मशहूर है । वहीं मेले में मुख्य आकर्षण देव तुंगासी और देवी महामाया का मेले में पहुंचना रहता है। मेले में तीन दिन रात्रि सांस्क़ृतिक संध्याएं भी आयोजित की जाती हैं। इस मेले में स्थानीय लोग साल भर की जरूरत की वस्तुएं भी खरीदते हैं।

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