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VIDEO : जौ की जूब और अखरोट से दियाली का पूजन, पकवानों में महकी खराहल घाटी

जिला मुख्यालय के साथ लगती खराहल घाटी सहित कुल्लू के विभिन्न इलाकों में सोमवार को दियाली उत्सव का आगाज सोमवार को देव परंपरा के अनुसार हुआ। मशालों की रोशनी से गांव जगमगा उठे। जौ की जूब, अखरोट, भल्ले आदि से दियाली का पूजन हुआ। समूची घाटी पारंपरिक पकवानों से महक उठी। गौर रहे कि हर साल बहुप्रतीक्षित पारंपरिक दियाली उत्सव पौष माह में जिले में मनाया जाता है। मंदिरों में दीप और मशालें जलाने के साथ गांव-गांव में पूरे उत्साह से दियाली उत्सव की धूम रही। आराध्य देवता जुआणी महादेव के भंडार के प्रांगण, थान देवता के मंदिर और ग्राहण में देव परंपरा के अनुसार जागरों को जलाया। साथ ही संध्याकाल में दियाली का विशेष पूजन हर घर में भल्ले, जौ की जूब और अखरोट से किया गया। मंगलवार को जुआणी महादेव और थान देवता के देवलुओं के बीच गूण (पराली घास से तैयार किया गया रस्सा) तोड़ने की देव परंपरा का निर्वहन भी जुआणी महादेव के मंदिर स्थित न्योली में किया जाएगा। देवता जुआणी महादेव के गोंठीदार राम नाथ ठाकुर ने कहा कि इस दौरान अश्लील जुमलों का आदान-प्रदान मर्यादा में रहकर किया जाता है। गांव थरमाण, न्योली, जगोट, जुआणी, ग्राहण, बराधा, सेउबाग, काईस में सोमवार को दिवाली पूजन हुआ। ऊझी घाटी के मनाली, जगतसुख, करजां, सरसई, नग्गर आदि गांव में भी दियाली मनाई गई। दियाली के मौके पर घरों में भल्ले, गीचे और पारंपरिक पकवान विशेष रूप से बनाए गए। इसके लिए गृहणियां दोपहर से रसोई में जुटी रहीं। देवता जुआणी महादेव के कारदार ओम प्रकाश महंत ने कहा कि कि देवता के भंडार में प्रांगण में जागरा देव विधान के अनुसार जलाया। मंगलवार को पूजा-अर्चना के बाद गूण बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके लिए हर घर से पराली को एकत्रित किया जाता है। दोपहर बाद गूण को तोड़ने की रस्म को देव परंपरा के अनुसार निभाया जाएगा।

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