महामाई भगवती और देव ब्रह्मा का पारंपरिक कनौन (हूम) पर्व श्रद्धा और देव परंपराओं के साथ मनाया गया। मूसलाधार बारिश के बावजूद 70 फुट लंबी लकड़ी की मशाल के साथ पूरी रात गांव की परिक्रमा की गई। देवी-देवता के रथों, वाद्य यंत्रों और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। भारी बारिश के बावजूद मशाल पूरी रात जलती रही, जिसे श्रद्धालुओं ने देव शक्ति और आस्था का प्रतीक बताया। परंपरा के अनुसार मशाल यात्रा के दौरान बुरी शक्तियों को दूर करने की रस्म भी निभाई गई।