विश्व प्रसिद्ध हिडिंबा देवी मंदिर परिसर बुधवार को आस्था, संस्कृति और देव परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बना। श्रीमद् देवी भागवत महापुराण कथा और महायज्ञ के शुभारंभ अवसर पर निकाली गई भव्य कलश यात्रा, देव समागम और देव मिलन को देखने के लिए हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़ पड़े। दिनभर मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र देव वाद्ययंत्रों से गूंजता रहा। देवी-देवताओं के आगमन के बाद वैदिक मंत्रोच्चारण और देव विधि के साथ कलश यात्रा का आगाज हुआ। कलश यात्रा में 108 कन्याओं ने भाग लिया। देव वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि ने आयोजन को और अधिक भव्य बना दिया। आयोजन का सबसे आकर्षक केंद्र देव समागम और देव-मानस मिलन रहा। घाटी के अनेक देवी-देवताओं ने महायज्ञ में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई। देवताओं के आगमन के साथ ही पूरा परिसर श्रद्धा और भक्ति के रंग में रंग गया। श्रद्धालु अपने आराध्य देवी-देवताओं के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए घंटों तक इंतजार करते रहे। कथा के दौरान विद्वान कथावाचक शंशाक कृष्ण कौशल देवी महिमा, सनातन संस्कृति, धर्म, भक्ति, नैतिक मूल्यों और मानव जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालेंगे। महायज्ञ में घुड़दौड़ से गणेश भगवान, सजला से विष्णु भगवान, जगतसुख से संध्या गायत्री, भनारा के फाली नाग, प्रीणी के शिरघन नाग, अलेउ से सृष्टि नारायण, कुलंग से पराशर ऋषि, गौशाल से कंचन नाग, ब्यास ऋषि, गौतम ऋषि, नसोगी से शंख नारायण, सियाल से सियाली महादेव, सिमसा से कार्तिक स्वामी, शलीन से शांडिल्य ऋषि, पारशा से वीरनाथ, बंजार घाटी से घटोत्कच, माता हिडिंबा और मनु ऋषि भाग ले रहे हैं।