7 फरवरी 1968 में कुजूम दर्रा के पास ढाका ग्लेशियर में भारतीय सेना के विमान में हुए शहीद सैनिकों की याद में 14931 फीट पर स्पीति के कुजुम दर्रा पर डोगरा रेजीमेंट द्वारा बनाए गए शहीद स्मारक का शुक्रवार को उत्तर भारत क्षेत्र का लेफ्टिनेंट जनरल डीजी मिश्रा ने उद्वघाटन किया। इस दौरान उनके साथ 136 आई इंनफेंटरी ब्रिगेड ग्रूप कमांडर रविद्र पाल सिंह मौजूद रहे। मुख्यतिथि ने स्मारक पर उन शहीदों को नमन किया और उन्हें पुष्प अर्पित करके श्रद्धाजलि दी। । यह स्मारक डोगरा स्काउट्स द्वारा निर्मित, स्मारक बलिदान, वीरता और राष्ट्रीय गौरव का एक स्थायी प्रतीक है। मुख्यतिथि लेफ्टिनेंट डीजी मिश्रा ने बताया कि 7 फरवरी 1968 को इंडियन एयर फोर्स फलाईट ए 1968 कुजूम दर्रा के नजदीक ढाका ग्लेशियर के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था जिसमें अभी तक भारतीय सेना को 9 शव मिला है। यह शव सैन्य अभियान दल ने बर्फ से ढके पहाड़ों से बरामद किया था। यह हादसा 7 फरवरी, 1968 को हुआ था जब लेह से चंडीगढ़ के लिए छह कुरू मेंबर सहित 96 भारतीय सेना का जवान का एक साथ उड़ा भरा और एएन-12 विमान खराब मौसम के कारण दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। दशकों तक विमान का मलबा और पीड़ितों के अवशेष बर्फीले इलाके में खोए रहे, लेकिन उस समय इस दुर्घटनाग्रस्त हवाई जहाज के बारे में कुछ पता नहीं चला जिसके कारण केंद्र सरकार ने लातपा घोषित किया था। जुलाई 2003 को अटल बिहारी बाजपेयी संस्थान मनाली के कुछ पर्वतरोहियों को हवाई जहाज का मलवा मिला और जिसकी जानकारी उन्होंने सेना और केंद्र सरकार को दी। इस जानकारी के बाद भारतीय सेना ने कई बार अलग अलग सर्च अभियान में अभी तक 9 सैनिकों के शव बरामद किया। हालांकि अभी तक अन्य शव और जहा ब्लैक बॉक्स नहीं मिला है। यह शहीद परिवारों के लिए श्रद्धा का स्थान है और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सैनिकों की अदम्य भावना पर प्रकाश डाला इस दौरान महिला मंडल चिचोम महिला मंडल के द्वारा मुख्यातिथि खतक पहना कर पारंपरिक तरीके स्वागत किया।