दो हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्रफल में फैले राजा के तालाब की ऐतिहासिक धरोहर तालाब के जीर्णोद्धार को लेकर युद्धस्तर पर कार्य लगातार चला हुआ है। प्रदेश सरकार के सहयोग से प्रशासन तालाब को झील में परिवर्तित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। विभिन्न विभागों की टीमें समय-समय पर अपने कार्यों को अंजाम देने के लिए तालाब के जीर्णोद्धार के कार्य में अपना सहयोग देने के पहुंच रही हैं। शनिवार को क्षेत्रीय बागवानी प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र की वैज्ञानिकों की मृदा(मिट्टी) विभाग की टीम ने तालाब की चारों तरफ से और मध्यस्थल से कुल 25 जगह से मिट्टी के सैंपल लिए। वैज्ञानिकों की टीम इन सैंपल के माध्यम से तालाब की मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और कार्बन के स्तर को जांचकर आकलन करेगी। इस दौरान कार्बन पर विशेष रूप से अध्ययन किया जाएगा कि तालाब में कार्बन की कितनी मात्रा हैं। डॉ. विपिन गुलेरिया ने बताया कि तालाब की खुदाई के चल रहे कार्य के दौरान टीम ने चारों कोणों और मध्यस्थल से बाहर मिट्टी के सैंपल एकत्रित कर लिए हैं। एकत्रित सैंपल के माध्यम से वर्षों पुराने उक्त तालाब में भीतर तक जमा कार्बन, फास्फोरस और नाइट्रोजन की जांच की जाएगी। वहीं भौतिक संरचना पर भी ध्यान दिया जाएगा जोकि भविष्य में पर्यावरण की दृष्टि से लाभदायक सिद्ध हो सकता है। उन्होंने कहा कि उक्त जांच अन्य तालाबों के सरंक्षण के लिए काफी लाभदायक सिद्ध हो सकता है। डॉ. रेणु कपूर ने बताया कि गहराई से मिट्टी के सैंपल लेकर मिनरल की जांच की जाएगी। वहीं पानी से संबंधित जांच के लिए कुछ समय लगेगा। इस मौके पर फील्ड एसिस्टेंट गुरुमुख सिंह व अन्य टीम मौजूद रही।