भारतीय डाक कर्मचारी संघ ग्रुप-सी हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों ने सोमवार को डाक विभाग धर्मशाला मंडल के अधीक्षक के कथित तानाशाही रवैये के विरोध में एक दिवसीय धरना दिया। इस दौरान कर्मचारियों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मनमानी, मानसिक उत्पीड़न और कर्मचारियों पर अनावश्यक दबाव बनाने के आरोप लगाए। धरने के दौरान कर्मचारियों ने बैनर के माध्यम से अपनी मांगें उठाईं और विभाग से कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने की मांग की। इस दौरान विभाग की ओर से कार्यालय के दोनों प्रवेश द्वारों पर ताले और लॉक लगाए गए। संघ की ओर से जारी मांगों में कर्मचारियों के प्रति कथित तानाशाही रवैया अपनाने, डराने-धमकाने और अनुचित दबाव बनाने की कार्रवाई बंद करने की मांग प्रमुख रही। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि छोटी-छोटी बातों पर अनावश्यक आरोपपत्र जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा लंबित वेतन मामलों का जल्द निपटारा करने और कर्मचारियों के जायज वित्तीय बकाया जारी करने की मांग भी उठाई गई। संघ ने लंबित टीए/टीपी दावों और मेडिकल बिलों का भुगतान करने की मांग भी विभाग के समक्ष रखी। संघ ने धर्मशाला मंडल के अधीक्षक रविंद्र कुमार शर्मा के प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों की स्वतंत्र जांच करवाने की मांग की। साथ ही कर्मचारियों के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और अनुकूल कार्य वातावरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। संघ के सदस्य प्रवीण ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का जल्द समाधान होना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपने विभागीय कार्यों का निर्वहन कर सकें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों और समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो शिमला सर्किल में भूख हड़ताल की जाएगी। वहीं, डाक विभाग धर्मशाला मंडल के अधीक्षक रविंद्र कुमार शर्मा ने कर्मचारियों की ओर से लगाए गए आरोपों पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि कार्यालय की ओर से किसी भी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाता है। कार्य करना कर्मचारियों का कर्तव्य है और काम करने से ही विभाग की आय जनरेट होगी। इस तरह धरने के दौरान कर्मचारियों ने जहां विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार और लंबित भुगतान की मांग उठाई, वहीं अधीक्षक ने दबाव बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए विभागीय कार्यों को कर्मचारियों का कर्तव्य बताया।