मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के 14 वर्ष के वनवास और पुत्र वियोग में राजा दशरथ के देहत्याग के मार्मिक प्रसंगों ने दाड़ी में आयोजित रामलीला के माहौल को भावुक कर दिया। वीरवार रात कलाकारों ने इन हृदयस्पर्शी दृश्यों का सजीव मंचन किया। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय और दमदार संवादों ने दर्शकों को रामायण के इन महत्वपूर्ण प्रसंगों से जोड़ दिया। रामलीला के दौरान उस प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत किया गया, जिसमें माता कैकेयी राजा दशरथ से अपने पुत्र भरत के लिए राजगद्दी और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगती हैं। कैकेयी की मांग सुनकर राजा दशरथ की व्याकुलता और असहायता को कलाकारों ने प्रभावशाली ढंग से मंच पर उतारा। श्रीराम के वनवास से राजा दशरथ को लगे गहरे आघात और पुत्र वियोग में उनके देहत्याग के दृश्य ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों ने अपने अभिनय के माध्यम से राजा दशरथ की पीड़ा और अयोध्यावासियों के शोक को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। रामलीला के इन प्रसंगों ने दर्शकों को धर्म, कर्तव्य, त्याग और पारिवारिक संबंधों की भावनात्मक गहराई का एहसास कराया। सजीव मंचन के दौरान दर्शक कथा के साथ भावनात्मक रूप से जुड़े नजर आए।