पांडवकालीन गसोता महादेव मंदिर में नववर्ष पर श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही। सुबह पांच बजे से देवालय में भक्तों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। इस दौरान काफी संख्या में भोले बाबा के दर्शन किए। गसोता महादेव मंदिर के पुजारी महंत राघवानंद गिरी ने बताया कि मंदिर लोगों की प्राचीन आस्था का केंद्र हैं। गसोता महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूर्ण होती है। मंदिर का इतिहास पांडवकालीन हैं। बाबा के दरबार में शीश नवाने से हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है। गसोता महादेव मंदिर में स्वयंभू शिवलिंग को बारिश का देवता भी माना जाता है। सदियों पुरानी परंपरा है कि जब बारिश नहीं होती तब स्थानीय लोग धोती और पानी से भरा घड़ा लेकर गसोता महादेव के मंदिर पहुंचते हैं। बारिश होगी अथवा नहीं इसको लेकर महादेव की तरफ से यहां श्रद्धालुओं को साक्षात प्रमाण दिया जाता है। धोती से लिपटे पानी के घड़े को जब भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है तो लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित भगवान भोलेनाथ के स्थापित चरणों में स्वत ही जल की धारा फूट पड़ती थी।