शारदीय नवरात्र की नवमी तिथि पर अवाहदेवी माता मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर प्रांगण में जुटी रही और माता के जयकारों से वातावरण गुंजायमान हो उठा। 22 सितंबर को प्रथम नवरात्र से प्रारंभ हुए पाठात्मक शत चंडी महायज्ञ का समापन नवमी को पूर्णाहुति के साथ हुआ। इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। सुबह 10 बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच हवन आरंभ और दोपहर 1 बजे शत चंडी महायज्ञ की पूर्णाहुति डाली गई। मंदिर प्रांगण भजन-कीर्तन और देवी के जयकारों से गुंजायमान रहा। नवरात्र समापन के बाद दशहरे के दिन भी अवाहदेवी माता मंदिर में पारंपरिक आयोजन होंगे। सुबह 10 बजे सिंदूर प्रथा निभाई जाएगी। इसके उपरांत अस्थायी मूर्तियों की भव्य विसर्जन यात्रा अवाहदेवी से कांडापतन (लघु हरिद्वार) तक निकाली जाएगी। ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों और जयकारों के बीच यह शोभायात्रा भक्तिमय उल्लास और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करगी।