स्मार्ट बिजली मीटर की पूरी लागत उपभोक्ताओं से टैरिफ के माध्यम से वसूली जाएगी। स्मार्ट मीटर लगाने के लिए उपभोक्ताओं पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। यह योजना न तो उपभोक्ताओं के हित में है और न ही हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड के दीर्घकालिक हित में, बल्कि इसका प्रमुख लाभ निजी कंपनियों को मिलने की आशंका है। हमीरपुर में पत्रकार वार्ता के दौरान उपभोक्ता कल्याण मंच ने यह आरोप लगाए। मंच के मुख्य संरक्षक जेएम पठानिया, संयोजक कुलदीप सिंह खरवाड़ा ने बताया कि उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा कानूनी अधिकार है कि आखिर इन मीटरों की आवश्यकता क्या है। यदि कोई उपभोक्ता स्मार्ट मीटर लगाने से इंकार करता है तो उसे नोटिस जारी करना तथा बिजली काटने की चेतावनी देना अनुचित है।इस दौरान मंच के सह-संयोजक सुरेश राठौड़, महासचिव जेके धीमान आदि मौजूद रहे।