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Hamirpur: विश्वकर्मा योजना के तहत अपनी कला को संवार सकेंगे लोग

पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे कामगार अब अपनी कला संवारने के लिए और अधिक बेहतर प्रयास कर सकेंगे। पारंपरिक यंत्रों व उपकरणों से अपने पैतृक व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे अकुशल कारीगरों को विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें उपकरण उपलब्ध करवाना शुरू कर दिया है। हिमाचल प्रदेश में पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत बढ़ई, नाव निर्माता, अस्त्रकार,लौहार, हथौड़ा और टूलकिट बनाने वाले, मरम्मतकार, मूर्तिकार, सुनार, कुम्हार, मिस्त्री, टोकरी /चटाई / क्वॉचर बुनकर / झाडू बनाने वाले, गुड़िया और खिलौने बनाने वाले, बार्बर, माली, वाशरमैन, टेलर, मछली का जाल बुनने वाले शामिल हैं। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 19 हजार 700 लोगों को उद्यम स्थापित करने के लिए पात्रता दे दी गई है। असंगठित क्षेत्र में हाथ और औजारों से काम करने वाले गुरु शिष्य परंपरा से संबंधित 18 पारंपरिक व्यवसायों के कारीगरों को फायदा दिया जा रहा है। अब इन लोगों के लिए उपकरण भेजना शुरू कर दिया है। यह उपकरण हमीरपुर में डाक विभाग के माध्यम से अन्य जिलों में भेजे जा रहे हैं। हमीरपुर में बुकिंग के अनुसार सप्लाई पहुंच रही है जिसे दूसरे जिलों में भेजा रहा है। इसके बाद इन्हें लोगों में बांटा जाएगा, ताकि वह अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ कर सकें। इस योजना का मुख्य उद्देश्य कारीगरों को कुशल कारीगर बना कर उनकी आर्थिकी को सुदृढ़ करना है। ''हिमाचल प्रदेश में विश्व कर्मा योजना के तहत उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं। इनकी सप्लाई डाक विभाग की ओर से भेजी जा रही है। हमीरपुर से गाड़ी के माध्यम से इन्हें कांगड़ा व अन्य जिलाें में भेजा जा रहा है। हमीरपुर व बिलासपुर सप्लाई पहुंच रही है। अब तक हमीरपुर में 328 व बिलासपुर में 314 टूल किट सप्लाई की जा चुकी है।'' - केएस चौहान, प्रवर अधीक्षक डाकघर मंडल हमीरपुर।

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