भाजपा विधायक त्रिलोक जम्वाल ने चीफ इंजीनियर विमल नेगी मौत मामले में सीबीआई को जांच सौंपने के हाईकोर्ट के आदेशों के बाद प्रदेश के अधिकारियों में जारी खींचतान और मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की ओर से की गई प्रेस वार्ता को लेकर टिप्पणी की है। हमीरपुर में पत्रकार वार्ता कर उन्होंने कहा कि प्रदेश की अफसरशाही कांग्रेस सरकार के नियंत्रण में नहीं है। इस संयुक्त प्रेसवार्ता में विधायक हमीरपुर आशीष शर्मा, पूर्व विधायक विजय अग्निहोत्री, कमलेश कुमारी और पूर्व जिला महामंत्री अजय रिंटू मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार के अधिकारियों ने अलग अलग शपथ पत्र दायर किए। चीफ सेकट्री एडिशनल चीफ सेकट्री की रिपोर्ट को मानने से इंकार कर रहे हैं। एसपी चीफ सेकट्री और डीजीपी की खिलाफत कर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। आखिर प्रदेश में चल क्या रहा है। प्रदेश के इतिहास में पहली दफा इस तरह की संस्कृति देखने को मिली है। अनुशासन वाली पुलिस फोर्स के अफसर आमने सामने हैं। तीन-तीन कमेटियां गठित कर विमल नेगी मौत मामले की जांच की गई लेकिन निष्कर्ष कुछ नहीं निकला। आखिर सरकार इस मामले में किसे बचाना चाह रही है। पहले पेन ड्राइव को गायब कर दिया गया और जांच के एक माह बाद पेन ड्राइव मिली तो इसका डाटा डिलीट कर दिया गया। आखिर इसमें मौजूद चार हजार फाइल में क्या सच है। एडिशनल चीफ सेकेट्री ओंकार शर्मा की कोर्ट में पेश रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि देर रात तक विमल नेगी कार्यालय में कार्य करते थे। आखिर उनपर कौन और क्या दबाव बना रहा था। सरकार के एडवोकेट जनरल सीबीआई जांच के खिलाफ हैं जबकि मुख्यमंत्री का बयान इसके विपरित है। एसपी शिमला हाइकोर्ट के फैसले के खिलाफ मीडिया में आकर डबल बेंच में अपील करने की बात कर रहे हैं। क्या एसपी और एसआईटी को यह अधिकार है। उन्होंने कहा कि विमल नेगी की पत्नी को न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी वहीं मुख्यमंत्री कहते हैं कि अगर उनसे सीबीआई जांच की मांग की होती तो वे सरकार खुद सीबीआई जांच की सिफारिश करती।