भाजपा नेता व पूर्व विधायक राजेंद्र राणा ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि उपचुनाव के लिए सीएम सुक्खू और कांग्रेस सरकार जिम्मेदार हैं। 22 मार्च को निर्दलीय विधायकों ने इस्तीफा दिया था। यह चुनाव लोकसभा चुनावों के साथ हो सकता था लेकिन इस्तीफा स्वीकार नहीं किया। यदि यह चुनाव लोस चुनावों के साथ होते तो करोड़ों का अतिरिक्त बोझ हमीरपुर की जनता पर नहीं पड़ता। इन उपचुनावों पर हो रहे खर्च के लिए सीएम सुक्खू और कांग्रेस सरकार जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में सीएम सुक्खू की तरह झूठ बोलने वाला मुख्यमंत्री आज तक नहीं है। उन्होंने झूठ बोलने में पीएचडी कर दी है। वह एक नंबर के झूठे व्यक्ति है। तानाशाही तरीके से छह विधायकों को निष्काषित किया गया। वह बिकने के आरोप विधायकों पर लगाते रहे लेकिन सुबूत पेश नहीं कर पाए। उनके पास कोई सुबूत नहीं है। किसी विधायक ने एक पैसा नहीं खाया है। मुख्यमंत्री जब चंडीगढ़ में जाते थे तो वह हिमाचल भवन में रूकने की बजाए फाइव स्टार होटल में बिना सिक्योरिटी के रूकते थे। यहां पर उद्योगपतियों से मुलाकातें होती है। आखिर होटल के बिल कौन देते थे। यह जांच का विषय है। हमीरपुर जिला की पिछले डेढ़ साल में अनदेखी हुई है। सीएम सुक्खू ने बेशक चुनाव नादौन से लड़ा लेकिन शिमला को तवज्जो दी है। अब हमीरपुर को शिखर पर ले जाने के झूठे दंभ भरे जा रहे हैं। सीएम सुक्खू ऐसा सोच रहे हैं कि वह ताउम्र के लिए मुख्यमंत्री बन गए हैं। हिमाचल में कांग्रेस सरकार में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। सीएम सुक्खू भ्रष्टाचार देने वालों को संरक्षण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के करीबी का ऑडियो भी वायरल हुआ। केसीसी बैंक में सैंकड़ों के हिसाब से वन टाइम सेटलमेंट कर भ्रष्टचार किया गया है। इस विषय की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच करवाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि नादौन में दो लाख 62 हजार में खरीदी गई जमीन को छह करोड़ से अधिक में बेची गई। यह जमीन सरकार को बेची गई। यह बहुत बड़ा घोटाला है। इस मामले की जांच होनी चाहिए। प्रदेशभर में माइनिंग बंद कर दी गई और महज सीएम के परिवार के लिए माइनिंग खुली रही। हिमाचल में आयकर विभाग की रेड पर कहा कि टैक्स चोरी की आशंका पर एजेसियां जांच करती है। हिमाचल में बिजली बोर्ड, बैंक में हो रहे है।