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यमुनानगर: छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक के विरोध में मसीह समाज ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

मसीह समाज राजनैतिक दल यमुनानगर की ओर से उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026 को रद्द करने और देशभर में मसीह समुदाय एवं पास्टरों पर हो रहे अत्याचारों को रोकने की मांग की गई। ज्ञापन में कहा गया कि यह कानून संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिले धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन करता है और व्यक्तिगत आस्था पर अनावश्यक सरकारी निगरानी थोपता है। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि कानून में प्रलोभन अनुचित प्रभाव और धोखा जैसे शब्दों की परिभाषा स्पष्ट नहीं है जिससे निर्दोष लोगों पर झूठे मामले दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि कठोर सजा के प्रावधान सामाजिक तनाव और सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा देंगे। ज्ञापन में कहा गया कि यह कानून मुख्य रूप से मसीह समुदाय को निशाना बनाता है, जिससे भय और उत्पीड़न का माहौल बन रहा है। साथ ही यह भी कहा गया कि वर्ष 1968 का पुराना कानून जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए पर्याप्त था, इसलिए नए कठोर कानून की आवश्यकता नहीं थी। आरोप लगाया कि विधेयक को बिना पर्याप्त चर्चा और विशेषज्ञों से परामर्श किए पारित किया गया। उन्होंने कहा कि देश के कई राज्यों में इसी प्रकार के कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं लंबित हैं, ऐसे में नए कानून को लागू करना जल्दबाजी है। ज्ञापन में उत्तर प्रदेश के चन्दौसी में पास्टर निखिल और उनके परिवार के साथ हुई घटना का भी उल्लेख किया गया। संगठन ने दावा किया कि वर्ष 2024 में मसीह समुदाय पर 834 हमले दर्ज हुए, जबकि 2025 के पहले सात महीनों में 334 घटनाएं सामने आईं। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो मसीही समुदाय अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेगा।

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