तीर्थराज कपालमोचन मेले के बाद शुक्रवार को जगाधरी के बर्तन बाजार में बर्तनों का मेला लगा। जिस तरह से कपालमोचन मेले से पीढ़ी ले जाने की परंपरा है, ठीक उसी तरह जगाधरी से बर्तन ले जाने की भी परंपरा है। कपालमोचन से वापस जाते समय जगाधरी से श्रद्धालु बर्तन खरीद कर ले जाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन कपालमोचन मेले में सरोवरों में स्नान करने के बाद श्रद्धालु जगाधरी बर्तन बाजार में जाकर बर्तनों की जमकर खरीदारी करते हैं। लौटते समय बर्तनों की खरीदारी करना शुभ माना जाता है इसलिए यह परपंरा शदियों से चली आ रही है। बताया जाता है पुराने समय में लोग कपालमोचन में बैल गाड़ियों या फिर सरकारी वाहनों में ज्यादा आते हैं। वापसी के समय वे जगाधरी में जरूर रुकते थे।