पूर्व सैनिक बोले- शहीदों का सम्मान तभी सार्थक, जब सैनिकों की समस्याओं का भी हो समाधान मिलिट्री सर्विस पेंशन में असमानताओं को समाप्त करने और अग्निवीर योजना के स्थान पर नियमित भर्ती प्रणाली लागू रखने की मांग सोनीपत। कारगिल विजय दिवस केवल भारत की सैन्य जीत का प्रतीक नहीं, बल्कि उन वीर जवानों के अदम्य साहस, त्याग और राष्ट्र भक्ति का स्मरण दिवस है, जिन्होंने दुर्गम बर्फीली चोटियों पर दुश्मन को परास्त कर तिरंगे की आन-बान-शान को अक्षुण्ण रखा। शनिवार को शास्त्री कॉलोनी में अमर उजाला की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में कारगिल युद्ध से जुड़े पूर्व सैनिकों ने अपने अनुभव साझा किए। इस दौरान जहां कारगिल के रणबांकुरों की वीरता की गाथाएं गूंजीं, वहीं पूर्व सैनिकों ने अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं और मांगों को भी प्रमुखता से उठाया। कार्यक्रम में शामिल पूर्व सैनिकों ने कहा कि कारगिल युद्ध देश के इतिहास का ऐसा स्वर्णिम अध्याय है, जिसने पूरी दुनिया को भारतीय सेना की क्षमता, साहस और अटूट राष्ट्र भक्ति का परिचय कराया। वर्ष 1999 में दुर्गम पहाड़ियों, शून्य से नीचे तापमान और लगातार हो रही गोलाबारी के बीच भारतीय जवानों ने जिस शौर्य का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। कैप्टन रामेश्वर सिंह ने कहा कि कारगिल युद्ध अघोषित लड़ाई थी, लेकिन भारतीय सैनिकों के हौसले किसी भी चुनौती से बड़े थे। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को भारतीय सेना की वीरता के आगे झुकना पड़ा। यह जीत केवल सेना की नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के आत्मविश्वास और एकजुटता की जीत थी। उन्होंने कहा कि देशवासियों को हमेशा अपने सैनिकों के त्याग का सम्मान करना चाहिए। कारगिल युद्ध में शामिल रहे हवलदार रमेश मलिक ने युद्ध के दिनों को याद करते हुए बताया कि उस समय कारगिल क्षेत्र तक पहुंचना बेहद कठिन था। आज वहां सड़क, संचार और परिवहन सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान सबसे पहले पाकिस्तान की ओर से फायरिंग हुई थी, जिसके बाद भारतीय सेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दुश्मन को मुंहतोड़ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का अनुशासन, समर्पण और आपसी तालमेल ही जीत की सबसे बड़ी ताकत बना। पूर्व सैनिक वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भारतीय जवानों ने विषम परिस्थितियों में भी मनोबल नहीं टूटने दिया और दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज भी पूर्व सैनिकों की कई समस्याएं वर्षों से लंबित हैं। विशेष रूप से मिलिट्री सर्विस पेंशन में व्याप्त असमानताओं को समाप्त कर सभी सैनिकों को समान लाभ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मांग लंबे समय से उठाई जा रही है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। धर्मबीर मलिक और बलवान दहिया ने कहा कि कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर लड़ाई लड़ना किसी भी सैनिक के लिए आसान नहीं था। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है और सेना हमेशा हर चुनौती के लिए तैयार रहती है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि अग्निवीर योजना के स्थान पर पूर्व की नियमित भर्ती प्रणाली को बहाल किया जाए, ताकि युवाओं को दीर्घकालिक सैन्य सेवा का अवसर मिल सके और सेना का अनुभव व परंपरा भी मजबूत बनी रहे। सूबेदार जयपाल सिंह, नायक श्रीकृष्ण दहिया, सूबेदार वेदप्रकाश, कैप्टन श्रीकृष्ण दहिया और सूबेदार जसबीर सिंह ने कहा कि सेना केवल नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का सर्वोच्च माध्यम है। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में सेना में भर्ती होकर देश सेवा का संकल्प लेने का आह्वान किया। उनका कहना था कि सेना का अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रहित सर्वोपरि रखने की भावना प्रत्येक युवा के व्यक्तित्व को नई दिशा देती है। पूर्व सैनिकों ने कहा कि कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को श्रद्धांजलि देना महत्वपूर्ण है, लेकिन उतना ही आवश्यक उन सैनिकों की समस्याओं का समाधान करना भी है, जिन्होंने अपना जीवन देश की सुरक्षा के लिए समर्पित किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार पूर्व सैनिकों की लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी। कार्यक्रम के अंत में सभी पूर्व सैनिकों ने कारगिल के अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी कुर्बानियां कभी भुलाई नहीं जा सकतीं। उन्होंने युवाओं से राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए देशभक्ति, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। पूरे कार्यक्रम में कारगिल के शहीदों के प्रति सम्मान, सेना के गौरव और पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान की मांग प्रमुख रूप से गूंजती रही।