आशा कार्यकर्ताओं ने वीरवार को अपनी मांगों को लेकर सिविल सर्जन कार्यालय में धरना दिया। इस दौरान उन्होंने सिविल सर्जन को निदेशक के नाम ज्ञापन सौंपकर बकाया मानदेय की मांग की। साथ ही अन्य लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई गई। सीआईटीयू के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग में सबसे निचले पायदान पर काम करती है। वह जनता के लिए स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभा रही है। वर्ष 2005 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की शुरुआत हुई थी, तब से उनके मानदेय में बहुत कम बढ़ोतरी की गई है। केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के बजट में लगातार कटौती कर रही है। जिस कारण आशा वर्कर्स के केंद्र स्तर के इंसेंटिव 13 साल से नहीं बढ़ाए गए है। जिससे कार्यकर्ताओं में नाराजगी है।