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मेरा गांव मेरी शान: पाकस्मा में स्टेडियम-नर्सरी के अभाव में दम तोड़ रहा युवाओं का सपना

रोहतक की मिट्टी से निकले पहलवानों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तिरंगा लहराया है। मगर उसी रोहतक के पाकस्मा गांव की तस्वीर इसके उलट है। यहां से दर्जनों खिलाड़ी निकलने के बावजूद गांव में न कोई खेल स्टेडियम है न ही खेल नर्सरी। सुविधाओं के टोटे के कारण युवाओं का भविष्य अंधेरे में है। पाकस्मा से अब तक कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय खिलाड़ी निकल चुके हैं। कुश्ती, कबड्डी और एथलेटिक्स में यहां के युवाओं की खास रुचि है लेकिन अभ्यास के लिए गांव में एक भी मानक स्टेडियम नहीं है। मजबूरन युवाओं को 15 किलोमीटर दूर रोहतक शहर जाना पड़ता है। आने-जाने में समय और पैसा दोनों खर्च होता है जिससे कई प्रतिभाएं बीच में ही खेल छोड़ देती हैं। गांव के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में खेल मैदान है, वहां खस्ता मैदान है। न ट्रैक है और न मैट। कुश्ती के लिए अखाड़ा तक नहीं। ग्रामीण दलजीत का कहना है कि प्रशासन ने आज तक गांव में न ओपन जिम दिया न ही इंडोर जिम का कोई सामान। बच्चे कच्चे मैदान और सड़कों पर दौड़कर अभ्यास करने को मजबूर हैं।

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