शनिवार को सेक्टर-1 में परीक्षा से पहले तनावमुक्त तैयारी विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने भाग लिया और अध्यापकों से परीक्षा को तनावमुक्त बनाने के उपायों पर सवाल किए। संवाद के दौरान शिक्षकों ने विद्यार्थियों को समझाया कि परीक्षा केवल अंकों का संग्रह नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और आत्मविश्वास की परीक्षा भी है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी आशंका को जिज्ञासा में और तनाव को सुव्यवस्थित तैयारी में बदल देता है, तब सफलता स्वयं उसका साथ देती है। भय वहीं उत्पन्न होता है, जहां तैयारी अधूरी होती है। बेहतर योजना और नियमित अभ्यास से मानसिक संतुलन बनाए रखा जा सकता है। अध्यापकों ने विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच अपनाने, समय प्रबंधन पर ध्यान देने और पुनरावृत्ति की स्पष्ट रणनीति बनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि अंक केवल स्मरण शक्ति का आकलन हैं, जबकि मेधा, परिश्रम और सकारात्मक दृष्टिकोण ही उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करते हैं। कार्यक्रम में यह भी संदेश दिया गया कि परीक्षा को ‘युद्ध’ नहीं, बल्कि ‘साधना’ समझकर तैयारी करनी चाहिए। साधना में निरंतर अभ्यास और एकाग्रता से सफलता स्वतः प्राप्त होती है। विद्यार्थियों ने कार्यक्रम को उपयोगी बताते हुए कहा कि इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और वे परीक्षा को लेकर पहले से अधिक सहज महसूस कर रहे हैं।