निजामपुर। ग्राम बामनवास स्थित संत रामेश्वर धाम आश्रम एवं मंदिर में सावन शिवरात्रि के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्तों ने 11 फीट ऊंचे महाकाल स्वरूप शिवलिंग पर दुग्ध एवं गंगाजल से विधिवत अभिषेक कर भगवान भोलेनाथ का पूजन-अर्चन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा रामेश्वर दास के दर्शन कर शिवलिंग पर जल अर्पित किया और सुख-समृद्धि की कामना की। दूर-दराज से आए कांवड़ियों ने भी भगवान शिव को कांवड़ अर्पित कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की। रामेश्वर धाम के पुजारी हनुमान शास्त्री एवं लक्ष्मण शास्त्री ने बताया कि सावन शिवरात्रि का पर्व धाम में अत्यंत श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्ति और हर-हर महादेव के जयकारों का वातावरण बना रहा। श्रावण मास की शिवरात्रि पर आयोजित अभिषेक कार्यक्रम में श्री बाबा रामेश्वर दास ब्रह्मचारी धर्मार्थ ट्रस्ट के प्रधान सुरेश कुमार केडिया सहित ट्रस्ट व समिति के सदस्य उपस्थित रहे। ट्रस्ट पदाधिकारियों ने बताया कि बाबा रामेश्वर दास भगवान शंकर के अनन्य उपासक थे और उनके सान्निध्य में अन्नपूर्णा माता की विशेष कृपा मानी जाती है। उन्होंने ही मंदिर में 11 फीट ऊंचे महाकाल स्वरूप शिवलिंग का निर्माण करवाया था। बाबा स्वयं शिवालय में बैठकर नियमित पूजा-पाठ, साधना और नित्य कर्म किया करते थे। धाम में प्रत्येक वर्ष सावन के दौरान कांवड़ चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मंदिर में किसी प्रकार का चंदा या दानपात्र नहीं रखा गया है और श्रद्धा से आने वाले सभी भक्तों का स्वागत किया जाता है। लक्ष्मण शास्त्री ने बताया कि बाबा रामेश्वर दास का देहावसान वर्ष 1984 में हुआ था। उनके पश्चात संत शम्भू दास महाराज, फिर रामजस महाराज गद्दी पर विराजमान हुए। वर्तमान में संत भाताजी महाराज धाम की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि 13 अगस्त 1976 को श्री बाबा रामेश्वर दास ब्रह्मचारी धर्मार्थ ट्रस्ट, श्रीरामेश्वर धाम, ग्राम बामनवास का विधिवत पंजीकरण कराया गया था। ट्रस्ट के माध्यम से आश्रम एवं मंदिर की चल-अचल संपत्तियों का प्रबंधन किया जा रहा है। सावन शिवरात्रि पर आयोजित इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण बना दिया। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।