उप मंडल के गांव धनौंदा की दक्ष प्रजापति धर्मशाला में चल रही श्रीमद् शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन शिव विवाह की कथा सुनाई। कथा वाचक आचार्य पूर्ण देव महाराज ने कहा कि आत्मा का परमात्मा में लीन होना ही शिव माना जाता है। भगवान शिव वैराग्य के देवता माने जाते हैं। बाबजूद शिव ने विवाह कर गृहस्थ आश्रम में रहकर वैराग्य धर्म का अनुसरण करने का तरीका दिया। शिव परिवार में भगवान का वाहन नंदी, मां पार्वती का शेर, गणेश जी का मूषक और कार्तिकेय का वाहन मोर है। सभी विपरीत विचारधारा के बीच सामंजस रखना शिव पुराण सिखाता है। उन्होनें भगवान के विवाह का वर्णन करते हुए कहा कि मैना देवी व हिमालय राज की पुत्री के रूप में मां पार्वती जन्म लेकर भगवान शिव की घोर तपस्या की। उसी दौरान तारकासुर के आतंक को खत्म करने के लिए शिव की तंद्रा भंग हुई। तब जाकर शिव का विवाह हुआ। यह सात दिवसीय श्रीमद शिव महापुराण कथा 12 मई तक चलेगी। इस दौरान भानुप्रताप, पंकज, अशोक कुमार, तुलसी, नेत्रपाल, मंजू, राजबाला, नीरज, मंजीत, दीपा, प्रियंका, भारती, नेहा, रजनी, अंजना शर्मा, बलवंती देवी सहित अन्य मौजूद रही।