मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक हब के लिए अधिग्रहित की गई जमीन के मुआवजे को लेकर बसीरपुर के किसानों ने नाराजगी व्यक्त की है। साथ ही किसानों ने आरोप लगाया कि उन्हें धोखे में रखकर जमीन अधिग्रहित की गई और मुआवजा भी काफी कम दिया गया। किसानों की मांग है कि भूमि अधिग्रहण बिल के तहत मुआवजा ब्याज के साथ मिले। अगर उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो वह आंदोलन को ओर तेज करेंगे। इसको लेकर किसानों ने मंगलवार को प्रेसवार्ता भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना रेट तय किए किसानों के पास से सहमति पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए हैं, उसमें किसानों को कितनी राशि मिलेगी यह भी नहीं लिखा था। साथ ही प्रेसवार्ता में तत्कालीन विधायक के करीबियों पर बहला फुसलाकर हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया है। किसानों का कहना कि जिस व्यक्ति ने सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करवाए थे वह उनके गांव में 35 साल से पशु अस्पताल में चिकित्सक था जिसकी वजह से उस पर विश्वास कर लिया। ग्रामीण कृष्ण कुमार ने आरोप लगाया कि किसानों को बिना बताए ही 30 लाख रुपये प्रति एकड़ दिया गया है। हालांकि उस समय उन्हें नहीं पता था कि कितनी राशि मिलनी चाहिए और उसे ही पर्याप्त मान ली। लेकिन कुछ किसान इसके खिलाफ कोर्ट में चले गए थे। जहां हाईकोर्ट ने किसानों के हक में फैसला सुनाया है।