नागरिक अस्पताल में सफेद मोतिया के करीब 30 से 40 पीड़ित उपचार के लिए आ रहे हैं। दूसरी ओर काला मोतिया के 3 से 4 पीड़ित अस्पताल में उपचार व जांच के लिए आ रहे हैं। सफेद मोतियाबिंद आंख के लेंस का धुंधला होना है, जिसका इलाज सर्जरी से दृष्टि वापस ला सकता है। इसके विपरीत काला मोतियाबिंद आंख का उच्च दबाव है, जो आंख की नसों को नष्ट करता है। जिससे हुई दृष्टि हानि अपरिवर्तनीय (ठीक न होने वाली) होती है। सफेद मोतिया में धुंधलापन और काला मोतिया में रोशनी कम होना प्रमुख है। सफेद मोतिया उम्र के साथ लेंस के धुंधले होने से होता है, जबकि काला मोतिया आंख के अंदर दबाव बढ़ने से होता है। सफेद मोतिया में दृष्टि धुंधली होती है, जबकि काले में दृष्टि की परिधि कम होने लगती है, जिसे मूक चोर भी कहते हैं, क्योंकि यह धीरे-धीरे दृष्टि छीनता है। नागरिक अस्पताल की नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरू यादव ने बताया कि काला मोतियाबिंद आनुवांशिक होता है और नवजात बच्चे में भी हो सकता है। समय समय पर आखों की जांच करवाते रहें। कोई भी लक्षण दिखाई दे तो स्वयं कोई भी दवा या आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें और चिकित्सक से सलाह लें।