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आंखें बंद कर वो कर देते हैं भाई बहन, जो खुली आंखों से भी नहीं कर पाते लोग

संवाद न्यूज एजेंसी नारनौल। शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव ताजपुर में रहने वाले वंशिका शर्मा व दक्ष भारद्वाज ने अपने ब्रेन को इस कदर नियंत्रित करना सीख लिया है कि वे बंद आंखों से भी वो सब कर सकते हैं, जो एक व्यक्ति के लिए खुली आंखों से करना लगभग नामुमकिन है। छठी कक्षा में पढ़ने वाली वंशिका व उसका छोटा भाई दक्ष तीसरी कक्षा में पढ़ रहे हैं और अपने निरंतर अभ्यास के बल पर वो ऐसा कर पाने में सफल हुए हैं। उनकी इसी कला से प्रभावित होकर उनके स्कूल प्रबंधन ने दोनों की फीस भी आधी कर दी है। डेढ़ साल पहले सीखा ब्रेन योगा: पिता मनोज शर्मा ने बताया कि करीब डेढ़ साल पहले बच्चों की स्कूल में ब्रेन मैपर झुंझुनूं निवासी अक्षय पारीक आए थे और उनकी कला को देखकर वे इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों को उनके पास ये हुनर सीखने के लिए भेज दिया। दोनों ही बच्चों ने झुंझुनूं व सरदारशहर, चुरू में रहकर करीब 45 दिन प्रशिक्षण प्राप्त किया। सीखा ब्रेन को कंट्रोल करना: इस प्रशिक्षण के दौरान बच्चों ने ब्रेन मैपिंग, दाएं व बाएं मस्तिष्क को कंट्रोल करना, ब्रेन योगा, त्राटक विधि व आध्यात्मिक साधना आदि सीखा और घर आने के बाद निरंतर अभ्यास जारी रखा। इसके अलावा उन्होंने वहां रहते हुए मानव शरीर के सातों चक्र मूलाधार चक्र, स्वाधिष्टान, सोलर प्लेक्स, हार्ट चक्र, विशुद्धि चक्र, अजना व क्राउन चक्र के जागरण की विधि भी सीखीं। बॉक्स: वंशिका और दक्ष दोनों आंखों पर पट्टी बांधकर साइकिल चलाना, किताब पढ़ना, सड़क पर चलती गाड़ियों की पहचान करना, रुबिक क्यूब सोल्व करना, पेंटिंग करना और सूई में धागा पिरोना सहित अनेक क्रियाएं करने में माहिर हो चुके हैं। दोनों बच्चों का कहना है कि वे इस विद्या को इस हद तक करना चाहते हैं कि एक दिन पूरे विश्व में भारत की एक अलग पहचान बनें। बॉक्स: वंशिका और दक्ष राजस्थान में बांदीकुई के विधायक, कई गांवों में, विधायक कंवर सिंह व सीताराम, ज्ञान बूस्टर स्कूल में व अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर नारनौल व अटेली में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर इनाम पा चुके हैं।

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